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सरकार के ‘टैक्स मास्टरस्ट्रोक’ पर फिदा हुए विदेशी निवेशक; महज 20 दिनों में भारतीय सरकारी बॉन्ड में झोंके 35,000 करोड़

news desk
Last updated: June 24, 2026 9:39 am
news desk
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  • बंपर निवेश: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जून के पहले 20 दिनों में भारतीय डेट मार्केट में रिकॉर्ड निवेश किया।
  • बड़ा बदलाव: 5 जून के टैक्स अध्यादेश (Tax Ordinance) के बाद सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की तरफ बढ़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स।
  • RBI का साथ: रिजर्व बैंक ने भी 15, 30 और 40 साल की अवधि वाले बॉन्ड्स को शामिल कर आसान किया रास्ता।

मुंबई / नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू बॉन्ड बाजार (Indian Bond Market) के लिए एक बेहद शानदार खबर है। केंद्र सरकार द्वारा विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स नियमों में दी गई हालिया रियायतों (Tax Relaxations) का जादुई असर दिखने लगा है। पिछले कुछ महीनों तक भारतीय बाजार से दूरी बनाने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अब भारतीय सरकारी बॉन्ड्स (Government Bonds) पर टूट पड़े हैं।

Contents
क्यों अचानक भारतीय बॉन्ड मार्केट की तरफ दौड़े विदेशी निवेशक?आंकड़ों की जुबानी: 20 दिन बनाम पिछले महीनेपहले कितना लगता था टैक्स?

भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (CCIL) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने के शुरुआती 20 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में 35,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर दिया है।

क्यों अचानक भारतीय बॉन्ड मार्केट की तरफ दौड़े विदेशी निवेशक?

इस रिकॉर्ड निवेश के पीछे सरकार और आरबीआई (RBI) की जुगलबंदी है, जिसने विदेशी फंड्स के लिए भारत में पैसा लगाना बेहद फायदेमंद बना दिया है:

  1. 5 जून का ऐतिहासिक अध्यादेश (Tax Amnesty): सरकार ने 5 जून को आयकर अधिनियम (Income Tax Act) में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी किया। इसके तहत FPIs को सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, ट्रांसफर या एक्सचेंज से होने वाली ब्याज आय (Interest Income) और कैपिटल गेन (Capital Gains) पर पूरी तरह से टैक्स छूट दे दी गई। सबसे खास बात यह है कि यह छूट पिछली तारीख यानी 1 अप्रैल, 2025 से लागू की गई है।
  2. वैश्विक सूचकांकों का प्रभाव: जेपी मॉर्गन (JP Morgan) और ब्लूमबर्ग (Bloomberg) जैसे बड़े वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में भारत के शामिल होने के बाद से ही भारतीय डेट इंस्ट्रूमेंट्स का आकर्षण वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा था, जिसे इस टैक्स छूट ने पंख लगा दिए।
  3. RBI द्वारा निवेश सीमाएं खत्म करना: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मॉनेटरी पॉलिसी में विदेशी निवेशकों के लिए ‘पूर्ण पहुंच मार्ग’ (Fully Accessible Route – FAR) का दायरा बढ़ा दिया है। अब इसमें 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय अवधि के नए सरकारी बॉन्ड भी शामिल कर लिए गए हैं, और शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट की सीमाएं हटा दी गई हैं।

आंकड़ों की जुबानी: 20 दिन बनाम पिछले महीने

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ‘फ्री-इन्वेस्टमेंट रूट’ (FAR) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो की हिस्सेदारी में कुछ ही दिनों में रिकॉर्ड उछाल आया है।

समय सीमा / महीनाभारतीय FAR सिक्योरिटीज में FPI निवेश (रुपये में)
03 जून, 20263.23 लाख करोड़
23 जून, 20263.58 लाख करोड़ (सिर्फ 20 दिन में 35,000 करोड़ की बढ़ोतरी)
मई 20265,512.10 करोड़
अप्रैल 20265,262.01 करोड़
मार्च 202617,687.98 करोड़ (निकासी/Outflow)

पहले कितना लगता था टैक्स?

इस अध्यादेश से पहले विदेशी निवेशकों को भारत में लिस्टेड शेयरों और बॉन्ड्स पर 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड्स से मिलने वाले ब्याज पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स (TDS) भी कटता था। इस भारी टैक्स स्ट्रक्चर के हटने से विदेशी निवेशकों का नेट रिटर्न (Net Return) काफी आकर्षक हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है: सरकार और आरबीआई के इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह (Foreign Capital Inflow) को बढ़ाना और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच भारतीय रुपये (INR) को मजबूती प्रदान करना है। जिस रफ्तार से डॉलर भारत आ रहा है, उससे रुपये को सीधे तौर पर सपोर्ट मिलेगा।

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TAGGED: Capital Gains Tax, FPI Investment India, Indian Debt Market, Indian Economy News, Indian Government Bonds, JP Morgan Bond Index, RBI FAR Route, Tax Exemption on Bonds, Withholding Tax
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