अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की ईरान नीति को अमेरिकी संसद (US Congress) में एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सीनेट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उस युद्ध शक्ति प्रस्ताव (War Powers Resolution) को मंजूरी दे दी है, जो राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ बिना संसदीय मंजूरी के सैन्य कार्रवाई बढ़ाने से रोकता है।
यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत होने के बावजूद उनके अपने ही चार सांसदों ने बागी रुख अपनाते हुए विपक्ष (डेमोक्रेट्स) का साथ दिया।
$80 अरब का भारी-भरकम खर्च और सांसदों की बगावत
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और नया एंगल ‘ऑपरेशन एपिक फुरी’ (Operation Epic Fury) पर होने वाला अंधाधुंध खर्च है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत हो गई थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है।
- पेंटागन की बड़ी मांग: एक तरफ जहां अमेरिकी जनता महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ पेंटागन ने गोला-बारूद की कमी को पूरा करने के लिए संसद से $80 अरब (80 Billion Dollars) के अतिरिक्त बजट की मांग की है।
- बजट पर रार: विपक्ष के नेता हकीम जेफ्रीस ने इस पर तंज कसते हुए कहा, “हमें ‘ऑपरेशन एपिक फेलियर’ पर टैक्सपेयर्स का एक भी पैसा और खर्च नहीं करना चाहिए।” इसी भारी-भरकम वित्तीय बोझ और जनता के बढ़ते गुस्से के कारण रिपब्लिकन सांसद भी बैकफुट पर आ गए हैं।
सीनेट और हाउस में कैसे पास हुआ प्रस्ताव?
अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार है जब संसद के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट) ने किसी राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए 1973 के ‘वॉर पावर्स एक्ट’ का इस्तेमाल कर प्रस्ताव पास किया है।
| सदन (House) | पक्ष में वोट (ट्रंप के खिलाफ) | विपक्ष में वोट (ट्रंप के साथ) | बागी रिपब्लिकन सांसद |
| यूएस सीनेट (उच्च सदन) | 50 | 48 | 04 सीनेटर |
| हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (निचला सदन) | 215 | 208 | 04 सांसद |
सीनेट में वोटिंग के दौरान दो रिपब्लिकन सांसद अनुपस्थित रहे, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के भी एक सीनेटर ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर ट्रंप के पक्ष में वोट किया।
स्विट्जरलैंड शांति वार्ता और ट्रंप के फैसले पर क्या होगा असर?
इस झटके का असर उस समय देखने को मिल रहा है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक सीजफायर (युद्धविराम) और शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।
- वार्ता कमजोर होने का डर: रिपब्लिकन सीनेटर जेम्स रिश ने चेतावनी दी है कि इस प्रस्ताव के पास होने से ईरान के हौसले बुलंद होंगे और वह बातचीत की मेज से उठकर भाग सकता है। ईरान सोचेगा कि जब अमेरिकी संसद ने ही राष्ट्रपति के हाथ बांध दिए हैं, तो वे कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं।
- व्हाइट हाउस का रुख: व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ‘असंवैधानिक’ और ‘गैर-बाध्यकारी’ करार दिया है। चूंकि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस नहीं भेजा जाता, इसलिए प्रशासन इसे नजरअंदाज करने की तैयारी में है।
- अदालत में जाएगा मामला? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वॉर पावर्स एक्ट की व्याख्या को लेकर व्हाइट हाउस और अमेरिकी संसद के बीच का यह विवाद अंततः देश की अदालतों (Courts) में ही सुलझाया जाएगा।