तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने भाजपा पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने भाजपा की कार्यशैली की तुलना उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन से कर दी। रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि भाजपा देश में लोकतंत्र को खत्म कर ‘एक-पार्टी व्यवस्था’ लागू करना चाहती है और इसके लिए वह सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद शुरू हुआ है।
क्यों भड़के रेवंत रेड्डी?
“वोट के बाद अब सीटें चुरा रही भाजपा”: रेवंत रेड्डी ने कहा कि उत्तर कोरिया में जिस तरह किम जोंग-उन यह तय करते हैं कि विपक्ष में कोई खड़ा न हो, ठीक वैसा ही रवैया भाजपा भारत में अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब सिर्फ वोट नहीं, बल्कि पूरी की पूरी सीटें चुरा रही है।
विवाद की जड़ मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट है, जहाँ कांग्रेस ने तेलंगाना की पार्टी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। भाजपा की आपत्ति के बाद चुनाव अधिकारी ने तकनीकी आधार पर नटराजन का पर्चा खारिज कर दिया, जिससे भाजपा के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के पास तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने तीसरा उम्मीदवार उतारा और एक साजिश के तहत कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द करवाकर सीट चुरा ली।
‘चुनाव अधिकारी ने भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम किया’
रेवंत रेड्डी ने चुनाव अधिकारी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा: “मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। केवल एक निजी शिकायत पर मिले नोटिस को आधार बनाकर उनका पर्चा खारिज कर दिया गया, जो कि नियमों के खिलाफ है। चुनाव अधिकारी ने निष्पक्ष रहने के बजाय भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम किया।”
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि कांग्रेस इस “अलोकतांत्रिक फैसले” के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के ‘भीतरघात’ की खबरों को खारिज करते हुए इसे भाजपा और बीआरएस की मिलीभगत बताया।
हिटलर वाले बयान पर दी सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने वाली एजेंसी ‘हाइड्रा’ और हिटलर से जुड़े अपने पुराने बयान पर भी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति हिटलर को अपना रोल मॉडल नहीं मान सकता।