नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि झाड़ू लगाना, बर्तन धोना या सब्जियां काटना भी कमाई का जरिया बन सकता है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन भारत के कई छोटे शहरों और कस्बों में हजारों महिलाएं यही काम करके पैसे कमा रही हैं। खास बात यह है कि उनका यह रोजमर्रा का काम दुनिया के सबसे एडवांस रोबोट्स को इंसानों की तरह काम करना सिखाने में इस्तेमाल हो रहा है।
तमिलनाडु के करूर की रहने वाली रम्या चंद्रा जैसी कई महिलाएं अपने सिर पर स्मार्टफोन या कैमरा बांधकर घर के सामान्य कामों की रिकॉर्डिंग कर रही हैं। इन वीडियो का इस्तेमाल बड़ी टेक कंपनियां अपने एआई आधारित रोबोट्स को प्रशिक्षित करने के लिए कर रही हैं, ताकि वे इंसानों की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम?
दुनियाभर में इस समय ऐसे रोबोट विकसित करने की होड़ है जो घरों, अस्पतालों और फैक्ट्रियों में इंसानों की तरह काम कर सकें। इसके लिए मशीनों को यह सिखाना जरूरी है कि कोई व्यक्ति किसी वस्तु को कैसे पकड़ता है, झुककर काम कैसे करता है या अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे प्रतिक्रिया देता है।
इसी उद्देश्य से लोगों के रोजमर्रा के कामों की रिकॉर्डिंग की जा रही है। कैमरे इंसानी नजरिए से पूरे काम को रिकॉर्ड करते हैं, जिससे रोबोट्स को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का डेटा मिल सके।
आसान नहीं है यह काम
रम्या चंद्रा के मुताबिक, यह काम देखने में जितना सरल लगता है, उतना होता नहीं है। सामान्य तौर पर 30 मिनट में पूरा होने वाला कोई घरेलू काम कैमरा पहनकर करने में 35 से 40 मिनट तक का समय ले सकता है। रिकॉर्डिंग के दौरान कई नियमों का पालन करना पड़ता है और हर गतिविधि को सही तरीके से कैद करना होता है।
हालांकि इस अतिरिक्त मेहनत के बदले प्रतिभागियों को प्रति घंटे लगभग 250 रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है, जो कई लोगों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा जरिया बन गया है।
हर दिन बदलते हैं तरीके और माहौल
रोबोट्स को ज्यादा सटीक प्रशिक्षण देने के लिए केवल एक तरह का वीडियो पर्याप्त नहीं होता। इसी वजह से रिकॉर्डिंग के दौरान हर दिन माहौल, स्थान और काम करने का तरीका बदला जाता है।
कभी बैठकर काम किया जाता है तो कभी खड़े होकर। अलग-अलग बर्तन, कपड़े और औजार इस्तेमाल किए जाते हैं। एक ही काम को कई एंगल से रिकॉर्ड किया जाता है ताकि मशीनें हर परिस्थिति को समझ सकें।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई केंद्रों पर रोजाना 90 से अधिक वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। यह पूरा डेटा रोबोट्स की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है।
क्या है फिजिकल AI की दौड़?
अब तक एआई मुख्य रूप से टेक्स्ट, तस्वीरों और आवाज को समझने तक सीमित था। लेकिन अब कंपनियां ऐसे रोबोट्स विकसित करना चाहती हैं जो वास्तविक दुनिया में शारीरिक काम भी कर सकें। इसे ही फिजिकल एआई की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऐसे रोबोट भविष्य में घरेलू कामों, बुजुर्गों की देखभाल, फैक्ट्री संचालन और खतरनाक जगहों पर काम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
रोजगार का नया मौका या भविष्य की चुनौती?
इस पूरी प्रक्रिया ने छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों, खासकर महिलाओं के लिए कमाई का नया अवसर पैदा किया है। बिना किसी विशेष तकनीकी ज्ञान के लोग एआई उद्योग का हिस्सा बन रहे हैं।
हालांकि इसके साथ एक सवाल भी जुड़ा हुआ है। जिन इंसानी गतिविधियों को आज मशीनों को सिखाया जा रहा है, भविष्य में वही मशीनें कहीं इंसानों की जगह न लेने लगें। यही वजह है कि एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर अवसर और चुनौतियों दोनों पर चर्चा तेज हो गई है।