लखनऊ: उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का कामकाज मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ से वापस लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कई बड़े राजनीतिक दावे किए हैं।
यूपीडा का कामकाज वापस लिए जाने पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ से यूपीडा का पूरा कामकाज वापस ले लिया गया है और अब यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के पास चला गया है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “अभी हाफ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ हो जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब सारे “घटिया एक्सप्रेसवे” बन गए और कथित तौर पर भ्रष्टाचार का लक्ष्य पूरा हो गया, तब यह कार्रवाई की गई है।
इलाहाबाद की सीटों को लेकर किया बड़ा दावा
सपा प्रमुख ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इलाहाबाद क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार बदलने की तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक भाजपा नेतृत्व को लगता है कि वहां के जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे, जिसके कारण पार्टी को लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यही रणनीति उन 43 लोकसभा सीटों पर भी अपनाई जा सकती है, जहां इंडिया गठबंधन को जीत मिली थी। साथ ही उन्होंने कुछ सीटों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
‘225 सीटों पर बदलने पड़ सकते हैं उम्मीदवार’
अखिलेश यादव ने दावा किया कि यदि मौजूदा हालात बने रहे तो भाजपा को करीब 225 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई मौजूदा विधायक भी आगामी चुनाव लड़ने के प्रति उत्साहित नहीं दिखाई दे रहे हैं।
उनके मुताबिक पीडीए के सामने भाजपा उम्मीदवारों की राह आसान नहीं होगी और पार्टी को चुनाव में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार की नीतियों पर भी बोला हमला
अखिलेश यादव ने प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, पेपर लीक और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
सरकार ने बताई बदलाव की वजह
गौरतलब है कि 27 मई 2026 को जारी आदेश के तहत यूपीडा से जुड़े सभी कार्य अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंप दिए गए हैं, जो सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य बेहतर समन्वय स्थापित करना और विकास परियोजनाओं में तेजी लाना है।