नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौर से उबरने के बाद अब दुनिया पर एक और बेहद खतरनाक वायरस का साया मंडराने लगा है। अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस (Ebola Virus) का प्रकोप बेहद हिंसक रूप ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इसे इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी (अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित किए जाने के बाद भारत सहित पूरी दुनिया में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
अब तक अफ्रीका में 900 से अधिक संदिग्ध मामले और 223 मौतों की आशंका जताई जा चुकी है। इस बार सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमण इबोला के सबसे दुर्लभ और जानलेवा ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo Strain) की वजह से फैल रहा है, जिसकी कोई वैक्सीन या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है।
1. बिना वैक्सीन का ‘बुंडीबुग्यो स्ट्रेन’: 50% तक मृत्यु दर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस का वही स्ट्रेन है जो पहली बार साल 2007 में युगांडा में देखा गया था।
- इलाज संभव नहीं: वर्तमान में मौजूद इबोला की वैक्सीन इस स्ट्रेन पर बेअसर हैं, जिससे इसे काबू करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
- हाई डेथ रेट: डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस विशिष्ट स्ट्रेन की चपेट में आने वाले मरीजों की मृत्यु दर 30% से 50% तक हो सकती है। इसके शुरुआती लक्षण मलेरिया से मिलते हैं, जिससे इसकी पहचान में देरी हो रही है।
2. कांगो में अस्पतालों पर हमले: भागे हुए मरीज बढ़ा रहे हैं सुपर-स्प्रेडर का खतरा
इबोला से जंग के बीच कांगो के इटुरी प्रांत से बेहद डराने वाली खबरें आ रही हैं। इटुरी के मोंगबवालु जनरल रेफरल अस्पताल पर विद्रोहियों द्वारा लगातार दो दिन हमले किए गए और इलाज के टेंटों को फूंक दिया गया।
खतरे की घंटी: इस हमले के बाद 18 इबोला मरीज अस्पताल से भाग निकले, जिनमें से एक अधिकारिक रूप से इबोला पॉजिटिव था और वह अब भी आम जनता के बीच घूम रहा है। पूर्वी कांगो के कुछ हिस्सों पर M23 विद्रोही संगठन का कब्जा होने के कारण स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
3. भारत में ‘कोविड’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल लागू, केरल में 21 दिन का क्वारंटाइन
भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 24 मई को एक सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है:
- यात्रा पर रोक: भारतीय नागरिकों को फिलहाल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।
- एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग: प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए हवाई अड्डों पर कोविड की तर्ज पर थर्मल स्क्रीनिंग और सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म अनिवार्य कर दिया गया है।
- केरल में सख्ती: केरल सरकार ने जोखिम वाले देशों से आने वाले हर यात्री के लिए 21 दिनों का अनिवार्य क्वारंटाइन लागू किया है।
हाल ही में युगांडा से बेंगलुरु लौटी एक संदिग्ध महिला को आइसोलेशन में रखा गया था, हालांकि राहत की बात यह रही कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की जांच में उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
4. वैश्विक स्तर पर उड़ानों पर पाबंदी, 9 देश ‘हाई रिस्क’ पर
- अमेरिका और कनाडा का कड़ा रुख: कनाडा ने प्रभावित देशों के नागरिकों के प्रवेश और इमिग्रेशन पर 90 दिनों के लिए पूरी तरह रोक लगा दी है। अमेरिका ने भी अपने नागरिकों को वहां न जाने की चेतावनी दी है।
- यूरोपीय संघ का एक्शन: यूरोपियन यूनियन (EU) ने वायरस की ट्रैकिंग के लिए अफ्रीका सीडीसी को 2 मिलियन यूरो (करीब 22 करोड़ रुपये) की आर्थिक मदद दी है।
- पड़ोसी देश निशाने पर: अफ्रीका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) ने अंगोला, केन्या, रवांडा, तंजानिया और जाम्बिया सहित 9 पड़ोसी देशों को ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में रखा है। युगांडा ने कांगो से लगी अपनी सीमाओं को सील कर उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है।