नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं परीक्षा के मूल्यांकन (OSM) में सामने आई गड़बड़ियों का मामला अब एक बड़े राजनीतिक युद्ध में बदल चुका है।
कॉपियों से पन्ने गायब होने और सही जवाबों पर शून्य अंक मिलने के बाद देश भर के लाखों छात्रों के आक्रोश के बीच विपक्ष ने मोदी सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ‘मोदी-प्रधान’ की जोड़ी ने देश की एक और प्रतिष्ठित संस्था (CBSE) को धांधली का प्रतीक बना दिया है।
राहुल गांधी का बड़ा हमला: “सवाल उठाने वाले 17 साल के बच्चों को कहा जा रहा देशद्रोही”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा के आईटी सेल पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा “दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। एक 17 साल का बच्चा जिसकी कॉपी गलत जांची गई, वह न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया, मगर उसे मदद के बदले गालियां मिलीं। भाजपा के आईटी सेल ने अपने ही देश के छात्र को ‘देशद्रोही’, ‘सोरोस का एजेंट’ और ‘डीप स्टेट’ का हिस्सा बता दिया।”
युवाओं से डरती है सरकार: राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी सरकार युवाओं और ‘जेन-जी’ (Gen-Z) से डरती है, क्योंकि वे अब अपने हक के लिए सवाल पूछ रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है और डराती है। पर सुन लीजिए मोदी जी, यही जेन-जी आपका अहंकार तोड़ेगा।”
जयराम रमेश का आरोप : OSM सिस्टम से 3% गिरा पासिंग प्रतिशत, भविष्य अधर में
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने भी एक विस्तृत बयान जारी कर सीबीएसई की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली की पूरी क्रोनोलॉजी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
- ऐतिहासिक गिरावट: इस नई और बिना तैयारी के लागू की गई डिजिटल चेकिंग प्रणाली की वजह से देश का पासिंग प्रतिशत अभूतपूर्व रूप से 3% गिरकर 88 से 85 फीसदी पर आ गया है।
- त्रुटियों की भरमार: धुंधली और अपठनीय उत्तर पुस्तिकाएं, गलत मूल्यांकन, छात्रों को किसी दूसरे की आंसरशीट मिल जाना और अत्यधिक पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) शुल्क वसूलना जैसी गंभीर खामियां लगातार सामने आ रही हैं।
- मंत्री की नाकामी: जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब 18.5 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा था, तो इस तकनीकी आपदा का पहले अनुमान क्यों नहीं लगाया गया? शिक्षा मंत्री को जागने में एक हफ्ता क्यों लगा? वे अपनी अक्षमता से खुले तौर पर छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आने के बाद छात्रों ने जब भारी फीस देकर अपनी स्कैन कॉपियां मंगवाईं, तो डिजिटल मूल्यांकन की बड़ी लापरवाहियां उजागर हुईं।
कई छात्रों की कॉपियों से मुख्य पन्ने गायब थे, तो कईयों के सही ऑब्जेक्टिव (MCQ) जवाबों को भी कंप्यूटर या परीक्षक द्वारा गलत ठहराकर जीरो नंबर दे दिए गए थे।
वेदांत नाम के एक छात्र को तो किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका ही भेज दी गई थी, जिसे बाद में बोर्ड ने अपनी गलती मानते हुए सुधारा। अब विपक्ष इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी में है।