केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के 10 दिन बाद, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नाम पर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। वीडी सतीशन (VD Satheesan) केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के 10 दिन बाद, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नाम पर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। वीडी सतीशन (VD Satheesan) केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
केरल विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद पिछले 10 दिनों से जारी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने वीडी सतीशन (VD Satheesan) के नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है।
यहाँ जानिए इस राजनीतिक घटनाक्रम की मुख्य बातें:
विराट बहुमत के बाद लंबा इंतजार
- केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने 102 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
- 4 मई को नतीजे आने के बावजूद मुख्यमंत्री के नाम को लेकर करीब 10 दिनों तक खींचतान चलती रही, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर कई सवाल खड़े हुए।
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी स्वीकार किया कि इस देरी ने जीत के उत्साह को कुछ हद तक कम कर दिया है।
दिल्ली में हुई हाई-लेवल मीटिंग
मुख्यमंत्री के नाम का फैसला दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत पार्टी के दिग्गज नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आधिकारिक तौर पर वीडी सतीशन के नाम की घोषणा की।
वायनाड में विरोध और ‘गांधी परिवार’ को चुनौती
नाम तय होने में हुई देरी के कारण केरल में जमीनी स्तर पर नाराजगी भी देखी गई:
- राहुल गांधी के पूर्व संसदीय क्षेत्र और प्रियंका गांधी के वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में गांधी परिवार के खिलाफ पोस्टर लगे।
- पोस्टरों में आरोप लगाया गया कि आलाकमान केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बना रहा था, जिसका राज्य में विरोध है।
- इन पोस्टरों में ‘वायनाड को दूसरा अमेठी’ बनाने की चेतावनी भी दी गई, जो सीधे तौर पर गांधी परिवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत है।
नया नेतृत्व और चुनौतियां
वीडी सतीशन के सामने अब राज्य में एक स्थिर सरकार देने और पार्टी के भीतर गुटबाजी को खत्म कर विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी। चुनाव नतीजों के बाद उपजी इस खींचतान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केरल में कांग्रेस की राह जितनी आसान जीत में दिखी थी, उतनी सत्ता संचालन में नहीं रहने वाली।