- हर महीने 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum — पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर भारी नुकसान झेल रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma के अनुसार, इन तीनों कंपनियों का संयुक्त अंडर-रिकवरी यानी लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये प्रति माह पहुंच चुका है।
वैश्विक संकट का असर भारत पर
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। India अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर देश की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है।
हालांकि, आम जनता पर बोझ कम रखने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। लेकिन इसका सीधा असर कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर भारी घाटा
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 25 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हुआ। इसके अलावा घरेलू उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बिक्री पर भी कंपनियां घाटा झेल रही हैं।
सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई थी, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। लेकिन इससे सरकार को हर महीने करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
चुनाव खत्म, अब बढ़ सकते हैं दाम
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले चार साल से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। इस दौरान कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए, जिसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही थी।
अब चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना तेज हो गई है। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं है।
दिल्ली में मौजूदा कीमतें
फिलहाल Delhi में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को ईंधन की महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।