लखनऊ। “पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील पर अब बवाल मचता हुआ दिख रहा है। जहाँ एक ओर विपक्ष पीएम मोदी पर हमलावर है, वहीं अब यूपी की राजधानी लखनऊ में भी इस बयान का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। दरअसल, सर्राफा व्यापारियों ने पीएम मोदी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और वैश्विक आर्थिक दबाव के मद्देनजर अगले एक साल तक ‘सोना न खरीदने’ की अपील के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। लखनऊ के सराफा व्यापारियों ने इस अपील को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश व्यक्त किया है।
व्यापारियों की चिंता: “पहले से मंदी, अब यह अपील”
राजधानी के प्रमुख सराफा बाजारों के व्यापारियों का कहना है कि सर्राफा बाजार पहले से ही मंदी की मार झेल रहा है। शादियों के सीजन के बावजूद कारोबार की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा सीधे तौर पर जनता से सोना न खरीदने की अपील करना व्यापारियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के बयान को सराफा उद्योग के लिए घातक बताया है। उनका तर्क है कि इस तरह की अपील से ग्राहकों के बीच भ्रम और डर का माहौल पैदा होगा।
व्यापारियों का कहना है कि सराफा उद्योग न केवल देश की जीडीपी में योगदान देता है, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी देता है। इस अपील से छोटे और मध्यम वर्ग के आभूषण विक्रेताओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। लखनऊ के व्यापारिक संगठनों ने अब अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संगठनों से संपर्क साधकर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री की अपील का संदर्भ
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में वैश्विक परिस्थितियों और तेल-गैस की बढ़ती कीमतों के कारण देश की विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए जनता से कुछ कड़े संयम बरतने को कहा था। इसमें उन्होंने ‘डिजिटल लेनदेन’ और ‘सार्वजनिक परिवहन’ के इस्तेमाल के साथ-साथ सोने की खरीद को कुछ समय के लिए टालने का सुझाव दिया था।
लखनऊ के व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस अपील को वापस नहीं लिया गया या उद्योग के लिए कोई राहत पैकेज नहीं दिया गया, तो वे अपने प्रदर्शन को और उग्र करेंगे। व्यापारियों ने अन्य व्यापारिक समूहों से भी साथ आने का आह्वान किया है ताकि सरकार तक उनकी आवाज प्रभावी ढंग से पहुँच सके।