आजकल का स्मार्ट टीवी सिर्फ आपके मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आपकी आदतों पर नजर रखने वाला एक ‘साइलेंट ऑब्जर्वर’ भी बन चुका है। हालिया टेक रिपोर्ट्स ने ACR (Automatic Content Recognition) टेक्नोलॉजी को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि आपका टीवी न सिर्फ यह जानता है कि आप क्या देख रहे हैं, बल्कि वो इस डेटा का इस्तेमाल आपके खिलाफ ही कर रहा है।
आखिर क्या है यह ‘ACR’?
ACR का मतलब है Automatic Content Recognition। यह एक ऐसा इंटेलिजेंट सॉफ्टवेयर है जो आपके स्मार्ट टीवी के हार्डवेयर में गहराई तक समाया होता है। यह एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आपके स्क्रीन पर चल रहे हर एक पिक्सल और ऑडियो क्लिप को ट्रैक करती है।
चाहे आप केबल टीवी देख रहे हों, नेटफ्लिक्स पर बिंज-वॉच कर रहे हों या गेमिंग कंसोल पर पसीना बहा रहे हों ACR को सब पता है।

कंपनियों के लिए ‘सोने की खान’
कंपनियां आपकी पसंद-नापसंद का एक डिजिटल प्रोफाइल तैयार करती हैं। आपके ‘व्यूइंग बिहेवियर’ का यह डेटा थर्ड-पार्टी एडवरटाइजर्स को भारी कीमतों पर बेचा जाता है। आप अपने लिविंग रूम या बेडरूम के बंद कमरे में जो भी देख रहे हैं, उसका पूरा चिट्ठा बाहरी कंपनियों के सर्वर पर सुरक्षित हो रहा है ताकि वे आपको ‘पर्सनलाइज्ड ऐड्स’ के जाल में फंसा सकें।
स्मार्ट टीवी की जासूसी से बचने के लिए ACR ) को डिसेबल करना बेहद आसान है, बस आपको अपने टीवी ब्रांड के अनुसार कुछ मामूली सेटिंग्स चेंज करनी होंगी।
Samsung यूजर्स ‘Settings’ के ‘Support’ सेक्शन में जाकर ‘Viewing Information Services’ को तुरंत ऑफ कर दें।
LG यूजर्स ‘General’ सेटिंग्स में ‘User Agreements’ के अंदर मौजूद ‘Live Plus’ फीचर को डिसेबल कर सकते हैं।
और वहीं Android या Google TV चलाने वाले लोग ‘Device Preferences’ में जाकर ‘Usage & Diagnostics’ को बंद कर अपनी डिजिटल प्राइवेसी लॉक कर सकते हैं।
Roku TV इस्तेमाल करने वालों को बस ‘Privacy’ मेनू में ‘Smart TV Experience’ के तहत ‘Use Info from TV Inputs’ को अनचेक करना होगा।
एक्सपर्ट एडवाइस: ‘Accept All’ की आदत बदलें
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी सबसे बड़ी गलती नया टीवी सेटअप करते समय बिना सोचे-समझे ‘Accept All’ पर क्लिक करना है। याद रखें, स्मार्ट डिवाइस खरीदते समय प्राइवेसी पॉलिसी को सरसरी निगाह से देखना और केवल जरूरी अनुमतियाँ देना ही आपकी डिजिटल सुरक्षा की चाबी है।
एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है की टेक्नोलॉजी आपकी सहूलियत के लिए होनी चाहिए, आपकी निगरानी के लिए नहीं। स्मार्ट बनें, सेटिंग्स बदलें और अपनी प्राइवेसी को वापस अपने हाथ में लें।