नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 15 वर्षीय रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति देने के अपने फैसले को चुनौती देने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा—“अगर कानून में समस्या है, तो उसे बदलिए।”
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने केंद्र के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा, “हम व्यक्तिगत विकल्पों का सम्मान करते हैं, आपको भी करना चाहिए।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक 15 वर्षीय रेप सर्वाइवर से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने मानवीय आधार पर गर्भपात की अनुमति दी थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर दी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और पीड़िता के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर मौजूदा कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता में बाधा बन रहा है, तो उसे संशोधित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
केंद्र के रुख पर सवाल
केंद्र सरकार द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने को लेकर कोर्ट ने अप्रसन्नता जताई। न्यायाधीशों ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।
इस टिप्पणी को महिलाओं के प्रजनन अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में एक अहम संदेश माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी साफ संकेत देती है कि न्यायपालिका व्यक्तिगत अधिकारों और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और क्या कानून में बदलाव की दिशा में कोई पहल होती है।