नई दिल्ली,30 अप्रैल 2026 : भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में आ गया है और गुरुवार को डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.19 के स्तर तक पहुंच गया। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये को कमजोर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, रुपया करीब 0.34% कमजोर होकर 95.17 के आसपास ट्रेड करता दिखा, जबकि इससे पहले यह 94.85 के स्तर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतों का बड़ा असर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $124 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर सीधा असर पड़ रहा है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल आया है।
डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश में गिरावट
रुपये पर दबाव का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी है। सुरक्षित निवेश के तौर पर निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं में गिरावट देखी जा रही है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने की प्रवृत्ति भी रुपये की कमजोरी को बढ़ा रही है।
शेयर बाजार पर भी असर
रुपये की कमजोरी और महंगे तेल का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही, रिजर्व बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार जाना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी संकेत माना जा रहा है। महंगा तेल, कमजोर निवेश प्रवाह और वैश्विक अनिश्चितता—इन तीनों का संयुक्त असर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा।