बेंगलुरु/मुंबई, 16 अप्रैल 2026: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Wipro ने चौथी तिमाही के नतीजों के साथ शेयरधारकों को बड़ी खुशखबरी दी है। कंपनी के बोर्ड ने ₹15,000 करोड़ के बड़े शेयर बायबैक को मंजूरी दे दी है। बायबैक की कीमत ₹250 प्रति शेयर तय की गई है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस के मुकाबले करीब 19% प्रीमियम है। यह कदम ऐसे समय आया है जब इस साल कंपनी के शेयरों में 20% से ज्यादा कमजोरी देखी गई थी।
यह तीन साल से ज्यादा समय बाद Wipro का पहला buyback है। कंपनी इसके तहत अधिकतम 60 करोड़ शेयर वापस खरीदेगी, जो कुल paid-up equity capital का करीब 5.7% है। यह buyback tender offer route से किया जाएगा, यानी eligible shareholders तय समय में अपने शेयर tender कर सकेंगे। कंपनी ने साफ किया है कि इसका मकसद shareholders को value return करना, extra cash का बेहतर इस्तेमाल और EPS (earnings per share) सुधारना है।
Buyback में promoters भी लेंगे हिस्सा
इस बार खास बात यह है कि promoter group ने भी buyback में भाग लेने की मंशा जताई है। इससे market को एक strong signal मिला है कि management अपनी capital allocation strategy को लेकर confident है। कंपनी के पास मजबूत cash reserves हैं, जिसकी वजह से इतना बड़ा buyback संभव हो पाया है।
Wipro management ने इसे long-term shareholder value creation strategy का हिस्सा बताया है। analysts का मानना है कि इससे short term में stock sentiment मजबूत हो सकता है, खासकर तब जब IT sector global slowdown और AI transition phase से गुजर रहा है।
बाजार में positive reaction, अब आगे क्या?
buyback announcement के बाद market में stock को लेकर positive buzz देखने को मिला। experts का कहना है कि ₹250 का offer price investors के लिए attractive premium है, इसलिए retail shareholders के बीच इसमें अच्छी interest देखने को मिल सकती है। हालांकि long term investors की नजर अभी भी company की deal pipeline, order book और Q1 guidance पर रहेगी।
अगर पिछले buyback से तुलना करें तो जून 2023 में Wipro ने ₹12,000 करोड़ का buyback ₹445 प्रति शेयर पर किया था। इस बार size बड़ा है, लेकिन offer price lower है, जो stock correction के बाद आया है।
कुल मिलाकर, Wipro का यह कदम IT sector में TCS, Infosys और HCL Tech जैसे peers के बीच capital return strategy को मजबूत करता है। short term में यह शेयर के लिए sentiment booster बन सकता है, जबकि long term direction company की growth visibility तय करेगी।
नोट: buyback में हिस्सा लेने से पहले shareholders को record date, tax implications और tender ratio जरूर check करना चाहिए।