नासिक। महाराष्ट्र के नासिक में ताबीज और झाड़-फूंक के बहाने महिलाओं का शारीरिक शोषण करने वाले पाखंडी बाबा अशोक खरात के कुकर्मों का घड़ा अब पूरी तरह भर चुका है। पुलिसिया जांच में जो खुलासे हो रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच में सामने आया है कि खरात का अपराधी बनने का सफर आज का नहीं, बल्कि साढ़े चार दशक पुराना है।
1980 का वो घिनौना कांड: जब लक्ष्मण को गांव से भागना पड़ा
जांच के अनुसार, साल 1980 में अशोक खरात (जिसका असली नाम तब लक्ष्मण खरात था) महज 20 साल का था। अहिल्यानगर जिले के कोपरगांव में उसने अपनी एक निसंतान महिला रिश्तेदार को जादू-टोने के जाल में फंसाकर उसका यौन उत्पीड़न किया था। जब ग्रामीणों को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने खरात की जमकर पिटाई की। अपनी जान बचाने के लिए वह रातों-रात गांव से फरार हो गया था।
15 साल की गुमनामी और पहचान का बदलाव
इस वारदात के बाद लक्ष्मण खरात करीब 15 सालों तक लापता रहा। पुलिस के लिए सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इन 15 वर्षों में वह कहाँ था। 15 साल बाद जब वह अपने पैतृक गांव कहंदलवाड़ी लौटा, तो उसने अपनी पहचान बदलकर ‘अशोक खरात’ रख ली थी। पुलिस अब उसके इस अज्ञात प्रवास और नाम बदलने के पीछे के नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है।
सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो का ‘डिजिटल जाल’
भोंदुबाबा की हैवानियत सिर्फ शारीरिक शोषण तक सीमित नहीं थी। जांच में पता चला है कि खरात के करीब 15 से 17 आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और कुछ पोर्न साइटों पर भी प्रसारित की गई हैं। वह महिलाओं को झांसे में लेकर उनका वीडियो बनाता था और फिर उन्हें ब्लैकमेल करता था।
पुलिस की कार्रवाई और बढ़ती मुसीबतें
खरात के खिलाफ अब कई पीड़ित महिलाएं हिम्मत जुटाकर सामने आ रही हैं। नासिक पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और बड़े खुलासे होंगे। पुलिस फिलहाल उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और तकनीकी सबूत जुटाने में लगी है।