कुवैत सिटी। मिडिल ईस्ट की जंग अब खाड़ी देशों (Gulf Countries) के आर्थिक बुनियादी ढांचे को अस्थिर कर रही है। रविवार सुबह कुवैत के रणनीतिक तेल क्षेत्रों, पावर प्लांट्स और सरकारी मुख्यालयों पर हुए सिलसिलेवार ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र में खतरे की घंटी बजा दी है। इन हमलों का सीधा असर कुवैत के ऊर्जा क्षेत्र और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है।
प्रमुख घटनाक्रम: कहाँ-कहाँ हुए हमले?
शुवैख ऑयल कॉम्प्लेक्स: कुवैत पेट्रोलियम कोऑपरेशन (KPC) के मुख्यालय और तेल मंत्रालय के परिसर में भीषण आग लगी।
- ऊर्जा संकट: दो बड़े ‘पावर और वॉटर डीसैलिनेशन प्लांट्स’ पर हमला। बिजली उत्पादन की दो यूनिट्स ठप।
- सरकारी ढांचे: मंत्रालयों के ऑफिस कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया, जिससे इमारतों को भारी नुकसान हुआ।
- बहरीन भी प्रभावित: कुवैत के साथ-साथ बहरीन की एक स्टोरेज फैसिलिटी में भी आगजनी की घटना सामने आई है।
ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए ‘रेड सिग्नल’
कुवैत OPEC के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक देशों में से एक है, जो रोजाना लगभग 2.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये हमले महज सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने की कोशिश हैं।
“बाजार विश्लेषक की माने तो अगर कुवैत के ऊर्जा ढांचे और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में इसी तरह बाधाएं पैदा की गईं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।”
ऑपरेशनल यूनिट्स को भारी नुकसान
कुवैत की सबसे बड़ी रिफाइनरियों मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्लाह—पर पहले भी हमले हो चुके हैं, लेकिन रविवार के हमलों की तीव्रता ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिजली और जल मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सप्लाई बहाल रखने के लिए ‘इमरजेंसी प्लान’ लागू कर दिया गया है।
ईरान की चुप्पी और बढ़ता तनाव
दिलचस्प बात यह है कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक दावा सामने नहीं आया है। ईरान, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति है, उसने भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और ईरान के खिलाफ उनकी सख्त रणनीति के बीच इन हमलों को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
संभावित परिणाम: क्या होगा आगे?
- सुरक्षा अलर्ट: कुवैत और बहरीन में सुरक्षा को उच्चतम स्तर (High Alert) पर रखा गया है।
- आर्थिक प्रभाव: हमलों की खबर के बाद सोमवार को एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों पर असर दिख सकता है।
- सैन्य प्रतिक्रिया: अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में निगरानी और पैट्रोलिंग बढ़ाई जा सकती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो इस जंग में कई खाड़ी देश पिस रहे हैं और अमेरिका भी उन्हें बचाने में नाकाम नजर आ रहा है। वहीं, ईरान लगातार अमेरिका का साथ देने वाले देशों को अपनी मिसाइलों से दहला रहा है।