हर महीने होने वाला पीरियड दर्द अगर सामान्य से ज्यादा हो, लंबे समय तक बना रहे या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई महिलाओं को पीरियड्स के समय दर्द होना आम बात लगती है, लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा हो, हर महीने बना रहे या रोज के कामकाज पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक कई बार ऐसा दर्द Endometriosis नाम की बीमारी का संकेत हो सकता है, जो आगे चलकर मां बनने में परेशानी पैदा कर सकती है।
एंडोमेट्रियोसिस क्या होती है ?
इस बीमारी में यूट्रस के अंदर बनने वाली परत शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगती है। आम तौर पर यह परत सिर्फ यूट्रस की लाइनिंग में रहती है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में यह ओवरी, फैलोपियन ट्यूब या पेल्विक हिस्से तक पहुंच सकती है। इससे अंदर सूजन होती है और दर्द बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट की राय क्या कहती है?
World Health Organization के अनुसार इसकी सही वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। कई मामलों में यह बीमारी परिवार में पहले से मौजूद रहने पर भी देखने को मिलती है। इसके अलावा जिन महिलाओं को ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी इम्यून से जुड़ी बीमारियां होती हैं, उनमें इसका खतरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है।
क्या होते हैं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण?
इस बीमारी की पहचान जल्दी नहीं हो पाती, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य पीरियड दर्द जैसे लग सकते हैं। पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, पीरियड्स के समय ज्यादा तकलीफ, ज्यादा ब्लीडिंग या लंबे समय तक प्रेग्नेंसी न होना इसके संकेत हो सकते हैं। डॉक्टर इसकी जांच अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या जरूरत पड़ने पर छोटी सर्जरी से करते हैं। कई बार सही बीमारी पता चलने में कई साल लग जाते हैं। इसका पूरी तरह खत्म करने वाला इलाज अभी नहीं है, लेकिन दवाओं और इलाज से दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कब करवाना चाहिए जांच?
अगर बच्चा होने में परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सलाह देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर पीरियड्स का दर्द सामान्य से ज्यादा हो, तो जांच जरूर करानी चाहिए। जल्दी पहचान होने पर इस बीमारी को संभालना आसान हो जाता है।