ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के 13वें दिन, ईरान की राजधानी तेहरान और आसपास के इलाकों में एक डरावना मंजर देखने को मिला। यहाँ सामान्य बारिश की जगह आसमान से ‘काला और चिपचिपा तेल’ बरस रहा है, जिसे साइंटिस्ट ‘ब्लैक रेन’ कह रहे हैं। जिसके बाद WHO और संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक बड़ी मानवीय और पर्यावरणीय आपदा घोषित किया है।
क्यों हो रही है काली बारिश?
पिछले 48 घंटों में अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों ने तेहरान के पास स्थित 30 से अधिक तेल भंडारों और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है।
धुएं का ये घना गुबार जब बादलों के साथ ‘केमिकल बॉन्डिंग’ करता है, तो पानी की बूंदें अपना क्रिस्टलाइन अपियरेंस खो देती हैं। जिसका रिजल्ट एक चिपचिपा, काला और एसिडिक तरल, जिसे साइंटिस्ट ‘ब्लैक रेन’ कह रहे हैं।

सेहत पर ‘केमिकल अटैक’ जैसा असर
हवा में मौजूद PM 2.5 कण और जहरीली गैसें सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर इन्फेक्शन और अस्थमा पैदा कर रही हैं। रेड क्रीसेंट सोसाइटी ने रिपोर्ट दी है कि इस बारिश के संपर्क में आने वाले लोगों को स्किन में जलन और आंखों में सूजन की शिकायत हो रही है।
तेल के धुएं में ‘बेंजीन’ जैसे पार्टिकल होते हैं, जो लंबे समय तक अगर बॉडी से कांटेक्ट में रहे तो वो कैंसर का कारण बन सकते हैं।

पर्यावरण के लिए ‘स्लो पॉइजन’
कृषि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह काला पानी मिट्टी की प्रोडक्टिविटी को खत्म कर रहा है। और अगर यह पानी नदियों में मिलता है, तो पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। साथ ही, वॉटर क्रीचर्स और फसलों के लिए ये एक ‘धीमे जहर’ की तरह काम करेगा।
ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी नागरिकों को घरों के अंदर रहने, बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनने और किसी भी हाल में बारिश के पानी को न छूने की अपील भी की है।