फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA वर्ल्ड कप 2026 से एक ऐसी खबर आई है जिसने खेल और राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वो अमेरिका में होने वाले वर्ल्ड कप में अपनी टीम नहीं भेजेगा। ईरान के खेल मंत्री अहमद दुनियामाली का ये बयान केवल एक खेल का फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक संदेश भी है।
क्यों लिया ईरान ने ये फैसला?
ईरान के इस बहिष्कार के पीछे की वजहें खेल से कहीं ज्यादा गहरी हैं। खेल मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर अमेरिका पर निशाना साधा। ईरान का आरोप है कि हालिया सैन्य हमलों और उनके सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई की मौत के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है। ईरान का कहना है कि जिस देश के साथ उनके युद्ध जैसे हालात हों, वहां उनके खिलाड़ियों और नागरिकों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
अहमद दुनियामाली ने ये भी कहा की “जिस शासन ने हमारे नेता की जान ली, हम उनके घर जाकर जश्न का हिस्सा नहीं बन सकते।”
क्या था प्लान?
ईरान ने क्वालीफायर राउंड में शानदार खेल दिखाकर ग्रुप G में अपनी जगह बनाई थी। उनके साथ इस ग्रुप में बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड जैसी टीमें थीं। ईरान के सभी मैच लॉस एंजिल्स और सिएटल जैसे अमेरिकी शहरों में होने थे। पिछले दिनों अटलांटा में हुई FIFA की हाई-लेवल मीटिंग में भी ईरान का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुँचा था, जिससे इस फैसले की सुगबुगाहट पहले ही शुरू हो गई थी।
ट्रंप का ‘वेलकम कार्ड’ हुआ फेल
हाल ही में FIFA प्रेसिडेंट गियानी इन्फेंटिनो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। ट्रंप ने भरोसा दिलाया था कि ईरानी टीम को वीजा और सुरक्षा की कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन ईरान ने इसे महज एक ‘दिखावा’ करार देते हुए इस ऑफर को ठुकरा दिया है।
अब किसकी लगेगी लॉटरी?
ईरान के हटने के बाद अब सबकी निगाहें FIFA पर हैं। नियमों के मुताबिक, ईरान की जगह एशिया (AFC) की ही किसी टीम को मिल सकती है।
अगर ईरान ऑफिशियली तौर पर हटता है, तो ये FIFA के इतिहास के सबसे बड़े बॉयकॉट में से एक होगा। अब देखना ये है कि क्या FIFA इस तनाव को कम कर पाता है या वर्ल्ड कप 2026 में कोई नई एशियाई टीम एंट्री मारती है।