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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गाजियाबाद के हरीश राणा का मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने की इजाज़त

news desk
Last updated: March 11, 2026 12:30 pm
news desk
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पैसिव युथनेसिया (Passive Euthanasia) से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। कोर्ट ने गाजियाबाद के 13 साल से बिस्तर पर पड़े हरीश राणा के परिवार को उनका मेडिकल सपोर्ट सिस्टम हटाने और निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) के लिए अनुमति दी।

मामले में हरीश के परिवार ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अपने सदस्य के जीवन समर्थन उपकरण को हटाने और उसकी इच्छानुसार जीवन का अंत करने की अनुमति मांगी थी।

जानकारी के अनुसार, हरीश राणा की यह स्थिति कॉलेज में एक दुर्घटना के दौरान सिर में लगी चोट के कारण हुई थी। तब से वे लगातार बिस्तर पर रहे और उनके सामान्य जीवन की क्षमता प्रभावित रही।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत में पैसिव युथनेसिया से जुड़े कानूनी और नैतिक बहस में मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे जीवन समर्थन और इच्छामृत्यु से जुड़े मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने हरीश राणा के मामले में कहा कि उन्हें जिस तरह से रखा गया है, वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम के समान है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मरीज अपने लिए निर्णय लेने में असमर्थ हो, तो उसके करीबी लोगों को उसके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।

कोर्ट ने बताया कि पिछले 13 सालों में हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में मरीज को कृत्रिम रूप से जीवित रखना केवल तभी उचित है जब इलाज से उसे वास्तविक लाभ हो और उसकी ठीक होने की संभावना मौजूद हो।

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