ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद यूरोप की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। ज्यादातर यूरोपीय देशों ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सतर्क और संतुलित रुख अपनाया है। एक तरफ उन्होंने ईरान के जवाबी हमलों की आलोचना की है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की सीधी निंदा करने से बचते हुए कूटनीति और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की अपील की है।
हालांकि इस मामले में स्पेन का रुख बाकी देशों से थोड़ा अलग नजर आया। स्पेन की मैड्रिड रीजनल असेंबली की सदस्य Manuela Bergerot ने खुलकर अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान पर हमलों को “महिलाओं के अधिकारों की रक्षा” का बहाना बनाना सरासर पाखंड है।
लड़कियों के स्कूल पर हमले का जिक्र कर बोलीं स्पेन की नेता
मैड्रिड असेंबली में बहस के दौरान बेरगेरोट ने ईरान के मिनाब इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले का जिक्र किया। उनके मुताबिक उस हमले में करीब 160 लड़कियों की मौत हुई थी।
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि “दक्षिणपंथी ताकतें इसी तरह ईरानी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करती हैं—160 लड़कियों की हत्या का जश्न मनाकर।” उन्होंने साफ कहा कि एक फेमिनिस्ट महिला होने के नाते वह अमेरिका और इजरायल के इन हमलों का कड़ा विरोध करती हैं।
बेरगेरोट ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि ऐसे युद्ध दुनिया में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं और हालात स्पेन के इतिहास की दुखद घटनाओं जैसे 2004 Madrid train bombings की तरह गंभीर हो सकते हैं।
यूरोपीय देशों का सावधानी भरा रुख
इस पूरे मामले में यूरोपीय संघ के कई बड़े देश फिलहाल बेहद सावधानी से बयान दे रहे हैं। उन्होंने मुख्य रूप से ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की है, लेकिन अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान पर सीधी टिप्पणी करने से बचते नजर आए हैं।
राजनयिक स्तर पर यूरोप के नेता लगातार तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भाषण
मैड्रिड असेंबली में दिया गया बेरगेरोट का भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसका वीडियो लाखों बार देखा जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान यूरोप की राजनीति में ईरान युद्ध को लेकर बढ़ती बहस को दिखाता है। खासतौर पर वामपंथी दलों के बीच अमेरिका की विदेश नीति को लेकर आलोचना पहले से ही तेज रही है।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस तरह के बयान वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।