कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी जयंती के दौरान माहौल तब बिगड़ गया जब एक जुलूस पर पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा और पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगा दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
गुरुवार शाम को मराठा समुदाय की ओर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली जा रही थी। जैसे ही ये जुलूस ‘किला ओनी’ इलाके की पंका मस्जिद के पास पहुँचा, डीजे की आवाज और नारेबाजी को लेकर दो गुटों में बहस हो गई।
आरोप है कि मस्जिद की तरफ से अचानक पत्थर और चप्पलें फेंकी गईं। इस हमले में बागलकोट के पुलिस कप्तान (SP) सिद्धार्थ गोयल के कंधे और गर्दन पर चोट आई है। उनके अलावा एक कांस्टेबल और एक कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं। पत्थरबाजी की खबर मिलते ही कुछ लोग भड़क गए और जवाबी कार्रवाई में सब्जी मंडी के पास तीन ठेलों को आग के हवाले कर दिया।
पुलिस का एक्शन और करंट स्टेटस
हालात बेकाबू न हों, इसके लिए पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई है: अब तक 8 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ड्रोन और कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि बाकी दोषियों को भी पकड़ा जा सके।
शहर के पुराने इलाकों में 24 फरवरी की रात तक धारा 163 लागू रहेगी यानी भीड़ जुटने पर पाबंदी है। हिंदू संगठनों ने साफ कहा है कि अगर सभी आरोपी जल्द नहीं पकड़े गए तो वे ‘बागलकोट बंद’ करेंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें और शांति बनाए रखें।