संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि विपक्षी दल अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में निष्पक्षता नहीं दिखाई और बार-बार ट्रेजरी बेंच को प्राथमिकता दी, जबकि विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश हुई।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसी मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ और आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद विपक्षी सांसद संसद परिसर में बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन करते दिखे, जिन पर लिखा था—“You can suspend us, but you can’t silence us।”
महिला सांसदों का स्पीकर को पत्र
इस बीच कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर को तीन पेज का कड़ा पत्र लिखकर उनके बयान पर आपत्ति जताई है। सांसदों का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप “झूठे, निराधार और मानहानिकारक” हैं और यह आरोप केवल प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को सही ठहराने के लिए लगाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था तथा किसी तरह का कोई खतरा नहीं था।
विपक्षी दलों की बैठक और आगे की रणनीति
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में इंडिया गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित कई दल शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, सभी दल स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमत हैं। इस प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर और 14-20 दिनों का नोटिस जरूरी होगा। हालांकि संख्या बल कम होने के कारण यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक माना जा रहा है।
लगातार बढ़ते विवाद और विरोध के कारण बजट सत्र का नौवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी। मौजूदा घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।