बॉलीवुड के लेजेंड एक्टर मनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म ‘Ghooskhor Pandat’ (घूसखोर पंडत) रिलीज से पहले ही बड़े कानूनी संकट में फंस गई है। फिल्म की टाइटल कॉन्ट्रोवर्सी बढ़ते ही यूपी सरकार ने सख्त स्टैंड लिया और मेकर्स पर शिकंजा कस दिया है।
लखनऊ में FIR दर्ज
यूपी मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश के बाद, लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे और उनकी पूरी टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने ये कार्रवाई समाज में जातिगत नेगेटिविटी और हेट्रेड फैलाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोपों के तहत की है।
यूपी पुलिस के अनुसार, “एंटरटेनमेंट के नाम पर किसी भी समुदाय या जाति का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। फिल्म का टाइटल पहली नजर में ही एक खास कम्युनिटी की इमेज खराब करता हुआ नजर आ रहा है”।
विवाद की मुख्य वजह
विवाद की जड़ फिल्म का नाम है। ‘घूसखोर’ (रिश्वतखोर) शब्द के साथ ‘पंडत’ (पंडित का बोलचाल वाला रूप) का इस्तेमाल करने पर ब्राह्मण समाज और कई संगठनों ने आपत्ति जताई है। फिल्म के जरिए एक पूरे समुदाय को भ्रष्टाचार से जोड़कर दिखाया जा रहा है।
फिल्म पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिसमें दलील दी गई है कि यह टाइटल संविधान की गरिमा के खिलाफ है।

डायरेक्टर नीरज पांडे की सफाई
बढ़ते बवाल और कानूनी दबाव को देखते हुए, फिल्म के राइटर और डायरेक्टर नीरज पांडे ने आज चुप्पी तोड़ी। उन्होंने एक ऑफिशियली बयान जारी कर क्लियर किया कि:
“हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है। इसमें ‘पंडत’ शब्द केवल मुख्य किरदार (अजय दीक्षित) का एक निकनेम है, न कि किसी जाति या धर्म का रिप्रेजेंटेशन हम किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते थे।”
मेकर्स उठाए गए ये कदम
नेटफ्लिक्स और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से फिल्म का टीज़र और प्रमोशनल वीडियो डिलीट कर दिया गया है। फिल्म का मार्केटिंग पर भी फिलहाल के लिए रोक लगा दिया गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो कॉन्ट्रोवर्सी को खत्म करने के लिए मेकर्स फिल्म का नाम बदलने पर भी सोच-विचार कर रहे हैं।
फिल्म के बारे में
‘घूसखोर पंडत’ एक क्राइम थ्रिलर है जो दिल्ली की एक रात की कहानी पर बेस्ड है। इसमें मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अफसर की भूमिका में हैं। फिल्म में उनके साथ नुसरत भरूचा और साकिब सलीम भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।