वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में यूनियन बजट 2026 पेश किया, जो कुल 53 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। बजट में आम आदमी, महिलाओं, किसानों और युवाओं पर फोकस किया गया है, जिसमें 7 नए रेल कॉरिडोर और गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में कमी जैसी घोषणाएं शामिल हैं। हालांकि, मिडिल क्लास और शेयर बाजार के निवेशकों की कई उम्मीदें टूट गईं, जिससे इन वर्गों में निराशा का माहौल है।
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई डेटा सेंटर्स, डिफेंस और कैंसर की दवाओं को सस्ता करने पर जोर दिया गया है। अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है, जबकि राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत पर रखा गया है। एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और जॉब्स पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
मिडिल क्लास की निराशा
मिडिल क्लास को इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद थी। नई टैक्स रिजीम में टैक्स-फ्री इनकम लिमिट को 12 लाख से बढ़ाकर 14 लाख रुपये करने की अपेक्षा थी, लेकिन कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके अलावा, पीपीएफ, एनपीएस और ईएलएसएस जैसी स्कीमों पर टैक्स छूट नई रिजीम में उपलब्ध नहीं कराई गई, जो केवल पुरानी रिजीम में ही मिलती है। सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की डिडक्शन भी अपरिवर्तित रही।
सीनियर सिटीजन के लिए इंश्योरेंस स्कीम और रेल टिकट कन्सेशन की उम्मीद थी, लेकिन केवल रेल कॉरिडोर की घोषणा हुई, टीडीएस डिडक्शन में कोई बदलाव नहीं।
शेयर निवेशकों को झटका
शेयर बाजार के निवेशकों को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रांजेक्शन चार्जेस में कमी की उम्मीद थी, लेकिन इसमें बढ़ोतरी कर दी गई। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (एलटीसीजी) और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (एसटीसीजी) में कोई राहत नहीं मिली।
किसानों की उम्मीदें भी टूटीं
किसानों को पीएम किसान योजना में 6000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये करने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बड़ी घोषणा की अपेक्षा थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछली बजट की कुछ कृषि घोषणाएं अभी भी लागू नहीं हुई हैं।
बजट में ग्रीन एनर्जी, डिफेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस है, लेकिन आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर सीधा असर कम दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक कदम है, लेकिन मिडिल क्लास और निवेशकों की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाया।