लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पिछले छह दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य बुखार की चपेट में आ गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस दौरान वे केवल दो बार ही पालकी पर आए। उनके चिकित्सकों ने उन्हें आराम की सलाह दी है, और फिलहाल वे अपने वैन में विश्राम कर रहे हैं।बता दे प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम नोज पर जाने से रोके जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह मामला अब सियासी रंग भी लेता नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए।
पूरा मामला क्या है?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार (18 जनवरी) को दावा किया कि मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान राज्य प्रशासन ने उन्हें संगम नोज की ओर जाने से रोक दिया। उनका आरोप है कि संगम घाट की ओर बढ़ते समय पुलिसकर्मियों ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, हालात ऐसे बन गए कि उन्हें और उनके अनुयायियों को पवित्र स्नान किए बिना ही अपने अखाड़े में वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पालकी को रास्ते में रोक दिया गया, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई।
वायरल वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते नजर आ रहे हैं कि, “हम अपनी लड़ाई चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह लड़ रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जन्म से ही हर हिंदू बच्चे का गंगा में स्नान करना उसका जन्मसिद्ध अधिकार होता है, लेकिन उन्हें संगम स्नान से वंचित कर दिया गया। स्वामी ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर दिया है।