ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार बयान दे रहे हैं और जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई की बात भी कह चुके हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिका के भीतर जो हो रहा है, वह ट्रंप की इन चिंताओं पर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब यह कहा जाने लगा है कि ईरान में झांकने से पहले ट्रंप को अपने ही घर के हालात पर नजर डालनी चाहिए।
ईरान पर नजर, लेकिन अमेरिका में भी सुलग रही आग
ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन 2026 में भी थमे नहीं हैं। आर्थिक बदहाली और सरकारी नीतियों से नाराज़ लोग सड़कों पर हैं। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अब तक 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका के पास “बहुत मजबूत” सैन्य विकल्प मौजूद हैं। ईरान ने भी पलटवार में चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा।
लेकिन सवाल यह है कि जब ट्रंप ईरान की सड़कों की चिंता कर रहे हैं, तब क्या उन्हें अमेरिका की सड़कों पर उतर रही भीड़ दिखाई नहीं दे रही?
ICE के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता, ट्रंप पर बढ़ता दबाव
न्यूयॉर्क सिटी में इन दिनों ICE यानी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट के खिलाफ बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शन ट्रंप प्रशासन की सख्त आप्रवासन और डिपोर्टेशन नीतियों के खिलाफ हैं। हाल ही में मिनियापोलिस की एक घटना के बाद यह गुस्सा और तेज़ हो गया, जिसके बाद मिडटाउन मैनहट्टन में ट्रंप टावर के आसपास हजारों लोग मार्च करते दिखे। न्यूयॉर्क ही नहीं, पोर्टलैंड, ह्यूस्टन समेत देश के कई शहरों में लोग ICE के खिलाफ सड़कों पर हैं।
सर्वे भी इशारा कर रहे हैं कि अमेरिकी जनता का रुख तेजी से ट्रंप और ICE के खिलाफ जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि आप्रवासन नीति जरूरत से ज्यादा सख्त और अमानवीय हो चुकी है।
कुल मिलाकर हालात साफ हैं। एक तरफ ट्रंप ईरान में लोकतंत्र और मानवाधिकार की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनके अपने देश में लोग नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध जता रहे हैं। आलोचक इसे दोहरा मापदंड बता रहे हैं। ऐसे में सवाल बार-बार उठ रहा है—ईरान में झांकने से पहले क्या ट्रंप को अपने घर के हालात नहीं देखने चाहिए?