भारत की सड़कों पर दौड़ते वो ’10-minute’ वाले डिलीवरी बैग्स क्या अब एक ड्रीम बनने वाला हैं? 2025 तक जो सेक्टर इन्वेस्टर्स का चहेता बना हुआ था, 2026 की शुरुआत होते ही वो एक बड़े संकट में फंस गया है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी कंपनियों के लिए अब सवाल ‘ग्रोथ’ का नहीं, बल्कि ‘सर्वाइवल’ का है।
राइडर्स का ‘Red Flag’
इस सेक्टर की रीढ़ कहे जाने वाले 2.3 लाख डिलीवरी पार्टनर्स ने कंपनी के लिय काम करना ठप कर दिया है। राइडर्स के लिए 10-मिनट की डेडलाइन अब ‘Life vs Delivery’ की जंग बन चुकी है। भारी ट्रैफिक, एक्सीडेंट्स का डर और घटते इंसेंटिव्स के बीच राइडर्स अब ‘Safety First’ की मांग कर रहे हैं। पेनल्टी सिस्टम ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
कहां है प्रॉफिट?
इन्वेस्टर्स अब सिर्फ ‘यूज़र्स’ नहीं, बल्कि ‘मुनाफा’ मांग रहे हैं। Zepto अपना 11,000 करोड़ रुपए का मेगा IPO लाने की तैयारी में है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स डरे हुए हैं क्योंकि ग्रोथ जीरो% हो रही है। और Flipkart Minutes और Swiggy Instamart के बीच चल रहे ‘डिस्काउंट वॉर’ ने कंपनियों की जेबें खाली कर दी हैं। हर ऑर्डर पर मुनाफा कमाने के चक्कर में कंपनियां अब ‘कस्टमर लॉयल्टी’ खो रही हैं।
रेगुलेशन का ‘हंटर’
CAIT (कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) और लोकल किराना स्टोर्स ने मिलकर सरकार पर दबाव बनाने की शुरुआत कर दी है जिसके चलते अब सरकार गिग वर्कर्स के लिए ‘सोशल सिक्योरिटी कोड’ लाने की तैयारी में है।
10 मिनट नहीं, अब ‘वैल्यू’ का खेल होगा
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब कंपनियां ‘ग्रोसरी’ से आगे बढ़कर ‘लाइफस्टाइल कॉमर्स’ की ओर शिफ्ट हो रही हैं। उनका कहना है की ‘अब सिर्फ दूध-दही से काम नहीं चलेगा। कंपनियां अब iPhone, प्रीमियम कॉस्मेटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स बेच रही हैं ताकि ऊंचे मार्जिन से घाटे को कम किया जा सके’।