पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां एक बार फिर सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राज्य में सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रही है। इसी बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जब कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
हालांकि, इस मुलाकात को लेकर अधीर रंजन चौधरी ने किसी राजनीतिक गठजोड़ के संकेत से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री से उनकी बातचीत पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति और खास तौर पर बंगाली प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर हुई। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में दूसरी तरह की चर्चाएं भी तेज हैं। प्रधानमंत्री मोदी से अधीर रंजन चौधरी की मुलाकात को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व से उनकी नाराजगी को लेकर पहले से ही अटकलें लगती रही हैं, और माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, अधीर रंजन चौधरी पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को लेकर असंतुष्ट हैं और यह भी चर्चा है कि वे चुनाव से पहले कांग्रेस से दूरी बना सकते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अधीर रंजन चौधरी या कांग्रेस पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।अधीर रंजन ने कहा कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर देश के कई हिस्सों में काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ राज्यों में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में ओडिशा में एक बंगाली मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरी जानकारी दी और हस्तक्षेप की मांग की।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी मजदूरों को सिर्फ बंगाली भाषा बोलने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय प्रशासन उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया समझ लेता है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।
अपने पत्र में अधीर रंजन चौधरी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के कई सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम आबादी अधिक है और बांग्लादेश से सटी सीमा होने के कारण, देश के अन्य हिस्सों में हो रही ऐसी घटनाओं का असर राज्य में सांप्रदायिक तनाव के रूप में सामने आ सकता है।
चुनाव से पहले इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर तेज हो गई हैं, लेकिन कांग्रेस की ओर से इसे मानवीय और संवैधानिक मुद्दा बताया जा रहा है, न कि किसी सियासी समीकरण का संकेत।