आजकल सुबह की शुरुआत नींबू-पानी से करना एक आम ट्रेंड बन चुका है। कई लोग मानते हैं कि यह पाचन को दुरुस्त करता है,कुछ का मन्ना है की ये चर्बी घटने के लिए हैल्थी और सेफ ऑप्शन है, शरीर को डिटॉक्स करता है और दिनभर एनर्जी बनाए रखता है। चाय या कॉफी की जगह नींबू-पानी पीना अब हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा समझा जाने लगा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आदत वाकई हर किसी के लिए सुरक्षित है?
अक्सर जब लोगों से पूछा जाता है कि उन्होंने नींबू-पानी पीना क्यों शुरू किया, तो जवाब मिलता है की उन्हें किसी ने सलाह दी थी या फिर इंटरनेट पर पढ़ा था। बहुत कम लोग डॉक्टर से पूछकर इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
रोज़ सुबह नींबू-पानी पीने के नुकसान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और किडनी रोग विशेषज्ञों की मानें तो रोज़ाना खाली पेट नींबू-पानी पीना हर किसी के लिए सही नहीं है। खासतौर पर लंबे समय तक ये पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। नींबू में मौजूद एसिड शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे किडनी को अपना काम करने में दिक्कत होती है।
किडनी और इलेक्ट्रोलाइट का संबंध
इलेक्ट्रोलाइट दरअसल कुछ जरूरी मिनरल्स होते हैं, जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और बाइकार्बोनेट। ये शरीर में नसों के संकेत, दिल की धड़कन और मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। स्वस्थ किडनी इन इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखने का काम करती है। लेकिन जब शरीर में एसिड या मिनरल्स का संतुलन बिगड़ता है, तो किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लगातार ऐसा होने पर किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत
अगर इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ जाए, तो इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। सिरदर्द, थकान, दिल की धड़कन का अनियमित होना, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह स्थिति किडनी से जुड़ी बीमारियों का कारण भी बन सकती है।
नींबू-पानी को सेहतमंद मानकर बिना सोचे-समझे रोज़ाना पीना सही नहीं है। हर शरीर की जरूरत अलग होती है। इसलिए किसी भी हेल्थ ट्रेंड को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि फायदे की जगह नुकसान न हो।