पटना। बिहार के चर्चित चेहरों में से एक, मांझी, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अगर वायरल वीडियो पर गौर करें तो मांझी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 2020 में 2600 वोट से हार रहे उम्मीदवार को डीएम की मदद से जीत दिला दी गई थी।
इस बार 1600 वोट से हार हुई, लेकिन हमें इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने उस समय के जिलाधिकारी का भी जिक्र किया, जो वर्तमान में त्रिपुरा में तैनात हैं।
सार्वजनिक मंच से मगही भाषा में दिए गए इस बयान के बाद अब चुनावी व्यवस्था और लोकतंत्र पर बहस तेज हो गई है।बता दें कि हाल ही में राहुल गांधी ने वोट चोरी के मामले को संसद और सार्वजनिक मंचों पर खूब उठाया है। उन्होंने कई बार इस विषय पर सरकार को घेरा और चुनाव आयोग से सवाल किए हैं। अब मांझी के ताजा बयान के बाद राजनीति और गरमा गई है।
दूसरी ओर, जीतन राम मांझी ने वायरल हो रहे वीडियो में छेड़छाड़ होने की बात स्पष्ट रूप से कही है।
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा “ये है वोट चोरी का सबूत। मोदी सरकार के मंत्री जीतन राम मांझी का कहना है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनका एक कैंडिडेट बुरी तरह हार रहा था।
फिर मोदी के मंत्री ने डीएम से सेटिंग की और हारते हुए कैंडिडेट को 2,700 वोट से जितवा दिया गया। इस बार उस कैंडिडेट ने मंत्री से संपर्क नहीं किया, इसलिए वह सेटिंग नहीं कर पाए और कैंडिडेट चुनाव हार गया। जानकारी के लिए, डीएम ही चुनाव आयोग के अधिकारी होते हैं।
इस बयान से साफ है कि नरेंद्र मोदी, बीजेपी और इनके सहयोगी दल ‘वोट चोरी’ करके चुनाव जीत रहे हैं। ये लोग चुनाव आयोग के साथ सेटिंग करके लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं।”
इस वायरल वीडियो के मामले को लेकर बिहार की सियासत में घमासान देखने को मिल रहा है। अब जीतन राम मांझी को इस मामले पर सामने आकर सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने साफ कहा कि मांझी अब एक ब्रांड बन गया है और उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
