गाजियाबाद की एक पॉश सोसाइटी के बंद दरवाजे के पीछे जो हुआ, वो किसी डरावनी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था। महज चंद रुपयों के किराए के लिए इंसानियत इस कदर शर्मसार होगी, ये किसी ने नहीं सोचा था। यहा एक लालची और सनकी किराएदार दंपति ने मामूली विवाद में अपनी मकान मालकिन को मौत के घाट उतार दिया।
हत्या के बाद आरोपी दंपति ने शव के कई टुकड़े किये और इन टुकड़ों को एक लाल रंग के सूटकेस में भरकर बेड के बॉक्स में छिपा दिया गया, ताकि किसी को शक न हो। ये घटना न केवल क्रूरता की हदें पार करती है, बल्कि आरोपी की सोची-समझी साजिश को भी उजागर करती है।
CCTV फुटेज ने खोला ‘मौत के कमरे’ का राज
वारदात का खुलासा तब हुआ जब 17 दिसंबर की शाम दीपशिखा नाम की महिला अचानक लापता हो गई। परिजनों ने जब बिल्डिंग के सीसीटीवी कैमरे को चेक किया तो सच देखकर उन सब के होश उड़ गए। दीपशिखा को किराएदार अजय गुप्ता के फ्लैट में जाते हुए तो देखा गया, लेकिन वो वापस बाहर नहीं निकलीं। यही वो लीड थी जिसने पुलिस को सीधे कातिलों के दरवाजे तक पहुंचा दिया।
भागने की कोशिश में दबोचे गए कातिल
जैसे ही दीपशिखा के परिजन और पड़ोसी शक के आधार पर अजय के फ्लैट पर पहुंचे, आरोपियों ने दरवाजा खोलने में काफी देर लगाई। दरवाजा खुलते ही अजय और उसकी पत्नी ने भीड़ को चकमा देकर भागने की कोशिश की, लेकिन ‘पब्लिक अलर्ट’ के कारण दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। मौके पर पहुंची ‘डायल 112’ की टीम ने कमरे की तलाशी ली, जहां बेड के अंदर छिपाए गए सूटकेस से दीपशिखा की लाश पाई गई।
सिर्फ किराए के लिए बने कातिल?
पुलिस की शुरुआती जांच में जो वजह सामने आई है, वो हैरान करने वाली है। दीपशिखा महज अपना बकाया किराया मांगने अजय के पास गई थीं। इसी दौरान बहस इतनी बढ गई कि दंपति ने मिलकर उनकी जान ले ली। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने लाश के साथ जो किया, उसने प्रोफेशनल क्रिमिनल्स को भी पीछे छोड़ दिया। इन सब के बाद दोनों ने अपना जुर्म भी पुलिस के सामने कबूला और बताया की उन्होंने दीपशिखा के गले को दुपट्टे से बांधकर/ घोट कर मार डाला।
पुलिस का एक्शन मोड:
पुलिस ने मुख्य आरोपी अजय गुप्ता और उसकी पत्नी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। क्राइम सीन से फॉरेंसिक टीम ने फिंगरप्रिंट्स और अन्य अहम सबूत जुटाए हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है|