वैश्विक मेटल मार्केट में इन दिनों जिंक का टेम्परेचर काफी हाई है। LME पर जिंक की स्पॉट कीमत 3,200 डॉलर प्रति टन के ऊपर पहुंच गई है, जो साल की शुरुआत से करीब 15–20% की बढ़त दिखाती है। इसका मुख्य कारण है सप्लाई चेन में दिक्कतें और दूसरी ओर भारत जैसे उभरते देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में बढ़ती मांग। इसका असर भारतीय शेयर बाजार में साफ दिख रहा है—हिंदुस्तान जिंक, वेदांता और हिंदाल्को जैसे स्टॉक्स में हाल के दिनों में मजबूत रैली आई है।
जिंक बूम: सप्लाई टाइट, डिमांड हाई और बाजार में जोरदार मूव्स
जिंक की कीमतों में ये उछाल कई वजहों से जुड़ा है। LME पर इन्वेंटरी काफी कम हो चुकी है, जिससे सप्लाई टाइट बनी हुई है। अक्टूबर 2025 में स्टॉक लगातार गिरने लगे और कीमतें 3,000 डॉलर पार कर गईं। चीन ने नवंबर में रिकॉर्ड 50,000 टन का निर्यात किया, फिर भी वैश्विक उत्पादन अपनी रफ्तार पकड़ नहीं पा रहा। दूसरी तरफ, EV बैटरी, गैल्वनाइजेशन और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में जिंक की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत में नॉन-फेरस मेटल्स की डिमांड 2024–25 में 9% बढ़ी और अगले साल भी इसी रफ्तार की उम्मीद है।
4 दिसंबर को LME जिंक कैश प्राइस 3,226 डॉलर बंद हुई, जबकि 3-महीने का फ्यूचर्स 3,085 डॉलर रहा। यानी जनवरी के 2,750 डॉलर से बाजार काफी ऊपर ट्रेंड कर रहा है।
शेयर बाजार में नॉन-फेरस सेक्टर ने सेंसेक्स को पीछे छोड़ दिया है। हिंदुस्तान जिंक ने 10% रेवेन्यू ग्रोथ और 15% EBITDA ग्रोथ दिखाई, और स्टॉक 12 सत्रों में 12% उछल गया। वेदांता में 5–7% की बढ़त आई, और नाल्को भी 3–5% ऊपर गया। हिंदाल्को थोड़ा दबा जरूर, लेकिन जिंक-एल्युमीनियम की तेजी से रिकवरी की उम्मीद मजबूत है।
आगे की तस्वीर देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि 2025–26 नॉन-फेरस सेक्टर के लिए अच्छा रहने वाला है। हां, ग्लोबल एजेंसियां कीमतों के थोड़ा नरम होने की उम्मीद कर रही हैं, लेकिन अभी के लिए जिंक की रैली बरकरार है। निवेश करते वक्त थोड़ा सावधान रहना जरूरी है, लेकिन EV और ग्रीन एनर्जी ट्रेंड्स जिंक को लंबी दौड़ का खिलाड़ी बना रहे हैं।