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नोबेल विजेता और AI के गॉडफादर हिंटन बोले, “AI से 50,000 नौकरियां खत्म”, भारत के युवाओं के लिए खतरे का अलार्म ?

news desk
Last updated: December 1, 2025 12:36 pm
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जेफ्री हिंटन की AI को लेकर चेतावनी
जेफ्री हिंटन की AI को लेकर चेतावनी
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI को दुनिया में पहचान दिलाने वाले और “AI के गॉडफादर” कहे जाने वाले नोबेल विजेता जेफ्री हिंटन ने एक बार फिर बड़ी चेतावनी दी है. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि AI जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, दुनिया फिलहाल उसके लिए तैयार ही नहीं है. अगर अभी सही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में नौकरी संकट और सामाजिक अस्थिरता नए स्तर पर पहुंच सकती है.

AI से नौकरी संकट और बढ़ती असमानता

2024 में भौतिकी का नोबेल जीत चुके हिंटन ने कहा कि AI का सीधा असर नौकरी बाजार पर पड़ेगा. उनका कहना है कि कंपनियां अब उन जगहों पर ज्यादा पैसा लगा रही हैं जहां इंसानों की जरूरत खत्म हो सकती है. सिर्फ 2025 में ही टेक कंपनियों ने 1.8 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म कर दीं, और इनमें से करीब 50,000 का कारण साफ तौर पर AI बताया गया। हिंटन का कहना है कि AI अमीरों को और अमीर बनाएगा, लेकिन करोड़ों श्रमिक बेरोजगारी की मार झेलेंगे.

लेकिन चिंता यहीं तक सीमित नहीं है. हिंटन कहते हैं कि आने वाले समय में सुपर-स्मार्ट AI सिस्टम इंसानों से भी ज्यादा समझदार हो जाएंगे और खुद को बंद या नियंत्रित होने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं. CBS को उन्होंने बताया कि अगले 30 वर्षों में मानवता पर AI से 10–20% तक खतरा हो सकता है. उनकी तुलना में AI अभी “प्यारे बाघ के बच्चे” जैसा है—जो बड़ा होकर खतरनाक हो सकता है.

युद्ध में AI का प्रयोग और बढ़ते खतरे

हिंटन ने चेताया कि AI का दुरुपयोग युद्ध को और खतरनाक बना देगा. स्वायत्त ड्रोन और मानवाकार रोबोट अमीर देशों को बिना अपनी सेना को जोखिम में डाले युद्ध करने की ताकत दे सकते हैं. उन्होंने इस खतरे को “युद्ध की नई दिशा” बताया और कहा कि ऐसे AI सिस्टम में इंसानों जैसी “मातृ प्रवृत्ति” डालनी चाहिए, ताकि वे मानवता के हित को नुकसान पहुँचाने वाली दिशा में न जाएं.

भारत पर कितना प्रभाव ?

भारत में जेफ्री हिंटन की इन चेतावनियों का प्रभाव बेहद गहरा और तत्काल होने वाला है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था अभी भी बड़े पैमाने पर मानव श्रम पर निर्भर है. आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की 2025 की रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में अगले 5-7 सालों में एआई के कारण 1.2 से 1.8 करोड़ नौकरियां (खासकर आईटी-बीपीओ, रिटेल, ड्राइविंग, मैन्युफैक्चरिंग और कस्टमर सर्विस सेक्टर में) पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं, जबकि सिर्फ 30-40 लाख नई हाई-स्किल एआई-संबंधी नौकरियां ही बनेंगी.

 इससे सबसे ज्यादा प्रभाव युवाओं और मध्यम-कुशल श्रमिकों पर पड़ेगा जो देश की 65% से अधिक आबादी है. यदि यूनिवर्सल बेसिक इनकम या बड़े पैमाने पर-कौशल कार्यक्रम शुरू नहीं हुए तो सामाजिक अस्थिरता, शहरी बेरोजगारी और आय असमानता चरम पर पहुंच सकती है. इसके अलावा हिंटन की सैन्य एआई वाली चेतावनी भी भारत के लिए खास चिंता की बात है क्योंकि सीमा पर ड्रोन और स्वायत्त हथियारों का इस्तेमाल पहले से ही बढ़ रहा है; बिना मजबूत नीतिगत ढांचे के यह क्षेत्र भी अनियंत्रित दौड़ का हिस्सा बन सकता है. कुल मिलाकर, हिंटन की चेतावनी भारत के लिए एक आखिरी अलार्म है कि बिना तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप के “एआई क्रांति” यहाँ विकास की बजाय विनाश का पर्याय बन सकती है.

AI कंपनियों से अपील

हिंटन ने AI कंपनियों से अपील की है कि वे अपनी कंप्यूटिंग शक्ति का कम से कम एक-तिहाई हिस्सा सुरक्षा और रिस्क रिसर्च पर लगाएं. उनका कहना है कि खतरा सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि समाज की उस संरचना का भी है जो बदलावों को संभालने के लिए तैयार नहीं है. दुनिया भर की गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियां अरबों डॉलर AI में निवेश कर रही हैं. इसी तेज दौड़ के बीच हिंटन की यह चेतावनी याद दिलाती है कि कहीं ऐसा न हो कि

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