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3I/ATLAS से आया रेडियो सिग्नल, 48 साल पुराने रहस्यमयी WOW! सिग्नल से क्या है इसका सम्बन्ध ?

सन 1977 की रात थी जेरी एहमान अकेले ही ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में बैठे थे तभी यूनिवर्सिटी का Big Ear रेडियो टेलीस्कोप चुपचाप अंतरिक्ष की गहराइयों को सुन रहा था — और तभी, 1420 मेगाहर्ट्ज़ पर एक रहस्यमय, तीव्र सिग्नल ने जेरी की नींद उड़ा दी. सिग्नल सिर्फ़ 72 सेकंड तक चला, लेकिन इतना अनोखा था जैसे अन्तरिक्ष से कोई इंटेलिजेंट सभ्यता का कोई मेसेज हो. और तभी सिस्टम से एक प्रिंट आउट निकलता है और उसपर जो मेसेज था उसे देखकर जेरी एहमान ने डेटा प्रिंटआउट पर लाल पेन से बस एक शब्द लिखा — “Wow!”. यह शब्द ही उस रहस्य का नाम बन गया, जो आज तक स्पेस विज्ञान की सबसे बड़ी पहेलियों में गिना जाता है.

48 साल बाद — इतिहास ने खुद को दोहराया ?

अब, 48 साल बाद, इतिहास जैसे खुद को दोहराता नज़र आया है.24 अक्टूबर 2025, दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ने फिर कुछ ऐसा सुना, जिसने वैज्ञानिकों को फिर से “Wow!” कहने पर मजबूर कर दिया. इस बार सिग्नल आया एक इंटरस्टेलर कॉमेट 3I/ATLAS से — 1665 से 1667 मेगाहर्ट्ज़ की वही फ्रीक्वेंसी रेंज, जहाँ से आम तौर पर OH रेडिकल्स (हाइड्रॉक्सिल अणु) की पहचान होती है. लेकिन यह सिग्नल साधारण नहीं था. इसकी बैंडविड्थ बेहद संकीर्ण (सिर्फ़ 5–7 kHz) थी, और इसकी दो लाइनों का अनुपात 1:1.8, जबकि सामान्यतः यह 1:1 होता है. इतना ही नहीं — यह सिग्नल भी उसी सैजिटेरियस कांस्टेलेशन (Sagittarius) की दिशा से आया, यानी उसी दिशा से, जहाँ से 1977 का “Wow!” सिग्नल मिला था.
क्या यह सिर्फ़ एक संयोग है? या कोई पैटर्न? इसी सवाल पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नज़रें टिक गई हैं.

वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री Avi Loeb का कहना है कि 3I/ATLAS शायद कोई सामान्य धूमकेतु नहीं है. उनके मुताबिक, इसकी asymmetric coma (यानी गैस और धूल का असमान फैलाव), अचानक सक्रिय हुआ रेडियो उत्सर्जन, और 16.16 घंटे की घूमने की अवधि इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यह वस्तु किसी कृत्रिम प्रोपल्शन सिस्टम या ancient interstellar probe का अवशेष हो सकती है — एक ऐसी जांच जो अरबों साल पहले किसी सभ्यता ने भेजी हो.

Loeb ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा —
“जब तक NASA का Juno spacecraft मार्च 2026 में इसे स्कैन नहीं कर लेता, हम यह नहीं कह सकते कि यह सिर्फ़ एक धूमकेतु है.”

16 मार्च 2026 को Juno, 3I/ATLAS के करीब से गुज़रेगा — लगभग 53 मिलियन किलोमीटर की दूरी से. अगर उस समय कोई modulated या repetitive signal मिला, तो यह मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी खोज होगी — शायद पहला प्रमाण कि हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं.
और अगर कुछ नहीं मिला? तो भी यह घटना इतिहास में दर्ज होगी — क्योंकि यह पहली बार है जब किसी इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट से स्पष्ट रेडियो अवशोषण दर्ज किया गया है.
1977 में हमने सिग्नल सुना, पर स्रोत नहीं देखा. 2025 में हमने शायद स्रोत देखा, पर सिग्नल को “प्राकृतिक” कहकर अनदेखा कर दिया.
अब, 2026 में, जब Juno हमें जवाब देगा — तो शायद मानव सभ्यता का अगला अध्याय एक
ही शब्द से शुरू होगा…
“Wow!”

news desk

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