असम के मशहूर गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग की सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई मौत
असम के मशहूर गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग की सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुई मौत ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है. लेकिन अब सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या यह हादसा टाला जा सकता था और क्या स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्हें विदेश ले जाना सही फैसला था.
स्कूबा डाइविंग के दौरान बिगड़ी हालत
19 सितंबर को 52 वर्षीय जुबिन गर्ग स्कूबा डाइविंग कर रहे थे. शुरुआत में उन्होंने लाइफ जैकेट पहनी थी, लेकिन वह उनके लिए काफी बड़ी थी. तैरने में परेशानी होने के कारण उन्होंने उसे उतार दिया. इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और सांस लेने में तकलीफ होने लगी. बचाव दल ने तुरंत CPR दिया और अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. उनका पोस्टमार्टम सिंगापुर में हुआ और बाद में पार्थिव शरीर भारत लाया गया. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 20 से 22 सितंबर तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया.
CID जांच के निर्देश
जुबिन की मौत को लेकर असम में बवाल मच गया है. मोरीगांव पुलिस स्टेशन में दो FIR दर्ज हुई हैं—एक उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा के खिलाफ और दूसरी नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक श्यामकानु महंता के खिलाफ. आरोप है कि आयोजन के दौरान सुरक्षा इंतज़ाम बेहद कमजोर थे और कलाकार की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरती गई. कुछ शिकायतों में यह भी दावा किया गया कि जुबिन को इवेंट के बहाने विदेश ले जाया गया, लेकिन असली मकसद उनकी हत्या करना था.
मुख्यमंत्री सरमा ने मामले की जांच CID को हतान्तरित करने के निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में दर्ज सभी FIR को मिलाकर एक केस बनाया जाए. अब जांच इस बात पर भी केंद्रित होगी कि क्या जुबिन की पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्हें विदेश ले जाना उचित था.
जुबिन गर्ग की अचानक मौत ने न सिर्फ उनके लाखों प्रशंसकों को झकझोर दिया है, बल्कि आयोजकों की भूमिका और सुरक्षा इंतज़ामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी निगाहें CID की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर यह एक दुखद हादसा था या लापरवाही और साज़िश का नतीजा.
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