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Reading: विज्ञान की सबसे चौंकाने वाली खोज- ‘Zombie Cell’ तकनीक से मृत कोशिकाओं को लैब में किया जिन्दा !
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विज्ञान की सबसे चौंकाने वाली खोज- ‘Zombie Cell’ तकनीक से मृत कोशिकाओं को लैब में किया जिन्दा !

news desk
Last updated: March 25, 2026 5:56 pm
news desk
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सिंथेटिक बायोलॉजी में बड़ा ब्रेकथ्रू
सिंथेटिक बायोलॉजी में बड़ा ब्रेकथ्रू
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नई दिल्ली:  विज्ञान की दुनिया में एक ऐसा कारनामा हुआ है, जो अब तक सिर्फ साइंस-फिक्शन फिल्मों में ही देखने को मिलता था। अमेरिका के J. Craig Venter Institute (JCVI) के वैज्ञानिकों ने मृत बैक्टीरिया की कोशिकाओं को दोबारा “जिंदा” कर दिखाया है। उन्होंने इन निष्क्रिय कोशिकाओं के अंदर दूसरे बैक्टीरिया का पूरा सिंथेटिक जीनोम डाल दिया, जिसके बाद ये कोशिकाएं फिर से बढ़ने और काम करने लगीं। वैज्ञानिकों ने इन्हें दिलचस्प नाम दिया है – ‘जॉम्बी सेल्स’ (Zombie Cells)।

Contents
आखिर ‘जॉम्बी सेल’ बनती कैसे है?2010 की खोज से एक कदम आगेक्यों खास है ये खोज?एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

यह दुनिया की पहली ऐसी सिंथेटिक बैक्टीरियल सेल मानी जा रही है, जो पूरी तरह गैर-जीवित हिस्सों से बनाकर फिर जीवित की गई है। एक्सपर्ट्स इसे सिंथेटिक बायोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा ब्रेकथ्रू मान रहे हैं, जिससे भविष्य में दवाइयों, बायोफ्यूल और पर्यावरण-अनुकूल प्रोडक्ट्स के उत्पादन में क्रांति आ सकती है।

आखिर ‘जॉम्बी सेल’ बनती कैसे है?

पूरी प्रक्रिया सुनने में थोड़ी फिल्मी लग सकती है, लेकिन है पूरी तरह साइंटिफिक। रिसर्चर्स ने सबसे पहले Mycoplasma capricolum नाम के बैक्टीरिया को एक खास केमिकल Mitomycin C से ट्रीट किया। इस केमिकल ने उसके डीएनए को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया – यानी कोशिका “फंक्शनली डेड” हो गई। वह खुद से बढ़ या रिप्रोड्यूस नहीं कर सकती थी, लेकिन उसका ढांचा (cell structure) जस का तस बना रहा।

इसके बाद असली गेम शुरू हुआ। वैज्ञानिकों ने दूसरे बैक्टीरिया Mycoplasma mycoides का पूरी तरह सिंथेटिक जीनोम तैयार किया और उसे इन “मृत” कोशिकाओं में ट्रांसप्लांट कर दिया। जैसे ही नया जीनोम अंदर गया, कुछ कोशिकाएं फिर से एक्टिव हो गईं और नए डीएनए के हिसाब से काम करने लगीं।

रिसर्च टीम की वैज्ञानिक Zumra Pecxaglam Sidel ने कहा, “कोशिका लगभग मर चुकी थी, लेकिन हमने उसे नई जिंदगी दे दी।” वहीं सह-लेखक John Glass के मुताबिक, “हम एक ऐसी कोशिका लेते हैं जो बिना जीनोम के है और काम नहीं कर सकती, फिर उसमें नया जीनोम डालकर उसे फिर से जिंदा कर देते हैं।”

यह रिसर्च फिलहाल प्रीप्रिंट प्लेटफॉर्म bioRxiv पर मौजूद है और अभी peer review प्रक्रिया में है।

2010 की खोज से एक कदम आगे

दरअसल, यह उपलब्धि 2010 की उस ऐतिहासिक रिसर्च का अगला लेवल है, जब Craig Venter की टीम ने पहली बार पूरी तरह सिंथेटिक जीनोम बनाकर एक जीवित कोशिका में डाला था। लेकिन उस समय रिसीवर सेल पहले से जिंदा थी।

इस बार कहानी अलग है – यहां वैज्ञानिकों ने पहले कोशिका को “मार” दिया और फिर उसमें नया जीनोम डालकर उसे जिंदा किया। यानी पहली बार पूरी तरह non-living सिस्टम से living cell बनाई गई है।

क्यों खास है ये खोज?

इस टेक्नोलॉजी के कई बड़े फायदे सामने आ सकते हैं:

  • अब वैज्ञानिक “खाली” कोशिकाओं में अपनी जरूरत के हिसाब से जीनोम डालकर नए माइक्रोब्स डिजाइन कर सकते हैं।
  • पहले जीनोम ट्रांसप्लांट में पुराने और नए डीएनए के मिक्स होने से गड़बड़ी होती थी, अब यह समस्या खत्म हो सकती है।
  • भविष्य में यह तकनीक E. coli जैसे आम बैक्टीरिया पर भी लागू हो सकती है, जिससे रिसर्च और तेज हो जाएगी।

National Institute of Standards and Technology की वैज्ञानिक Elizabeth Strychalski ने कहा, “अब जीवन और मृत्यु के बीच की रेखा और धुंधली हो गई है। हम इन प्रक्रियाओं को इंजीनियर कर सकते हैं।”

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

फ्रांस के INRAE के वैज्ञानिक Olivier Borkowski ने इसे “सिंथेटिक बायोलॉजी में बड़ा कदम” बताया है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ने बायोसेफ्टी को लेकर सवाल भी उठाए हैं, लेकिन फिलहाल रिस्क कम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह खोज भविष्य की बायोटेक दुनिया को पूरी तरह बदल सकती है। अब वैज्ञानिक सिर्फ जीवों को समझेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजाइन भी कर पाएंगे। “जॉम्बी सेल” सुनने में भले डरावना लगे, लेकिन यह टेक्नोलॉजी आने वाले समय में दवा, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में बड़ा गेमचेंजर बन सकती है।

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TAGGED: bacteria research, bio research, biofuel technology, Biotechnology Breakthrough, dna research, future medicine, genetic engineering, genome editing, jcvi research, lab experiment, microbiology, mycoplasma, Science News, synthetic biology, zombie cells
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