नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड में होने वाली ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव चरम पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने को लेकर ईरान और अमेरिका के विरोधाभासी दावों ने पूरी दुनिया के बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
एक तरफ जहां ईरान ने इस समुद्री मार्ग को बंद करने का दावा किया है, वहीं अमेरिकी सेना ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए यातायात को सामान्य बताया है। इस टकराव के कारण अब आगामी शांति वार्ता के भविष्य पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने सीधे तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वाशिंगटन ने अंतरिम समझौते की पहली और बुनियादी शर्त को लागू नहीं किया। तेहरान का कहना है कि जब तक यह समझौता सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा, तब तक मिडिल ईस्ट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल व्यापार प्रभावित होता रहेगा।
इसी के जवाब में ईरान के खातम-अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने का एलान किया और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने इस रूट पर आने वाले जहाजों को सुरक्षा के लिहाज से सख्त चेतावनी जारी की है।
ईरान के दावों के तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मोर्चा संभाला। सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी है।
“ईरान इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को नियंत्रित नहीं करता है। नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) पूरी तरह बरकरार है। सिर्फ शनिवार को ही 55 वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रूप से यहाँ से गुजरे हैं।”
— प्रवक्ता, CENTCOM
स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इस स्थिति पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि ईरान ने वास्तव में होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। वेंस ने उम्मीद जताई कि इस तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयासों के जरिए युद्धविराम को बनाए रखा जा सकेगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित लेबनान संकट पर सकारात्मक बातचीत होगी।
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