ईरान-इजरायल के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ नजर आने लगा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले समय में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एक ओर United States समझौते की कोशिशों में जुटा है, वहीं Iran ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समाधान के लिए उसकी शर्तें अहम होंगी।
संघर्ष के तेज होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल बढ़ गई है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। कई राज्यों में पेट्रोल-डीजल को लेकर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनती दिख रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही है। Madhya Pradesh और Gujarat में ईंधन खरीदने की होड़ देखी जा रही है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर लॉकडाउन जैसी स्थिति बनने और वर्क फ्रॉम होम की अपील से जुड़े कई दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच सरकार ने इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
अब केंद्र सरकार ने इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार को साफ कहा कि लॉकडाउन की खबरे. पूरी तरह झूठी हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार ऐसा कोई कदम उठाने पर विचार भी नहीं कर रही. उन्होंने लोगों से अपील की कि इस मुश्किल वक्त में शांत रहें, ज़िम्मेदारी दिखाएं और एकजुट रहें।
संसद भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने भी स्थिति को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से जुड़ी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, ताकि बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सके। रिजिजू ने कहा कि संसद में सांसद इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री Narendra Modi का आभार व्यक्त करेंगे।
मिडिल ईस्ट में जारी संकट का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
उन्होंने बताया कि इस तेजी का असर दुनियाभर में देखा जा रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30% से 50% तक की वृद्धि हुई है, जबकि उत्तरी अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में लगभग 50% तक कीमतें बढ़ी हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अन्य देशों की तरह घरेलू ईंधन कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाए, या फिर आम नागरिकों को राहत देने के लिए वित्तीय बोझ खुद उठाया जाए। उन्होंने बताया कि Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार ने दूसरे विकल्प को चुना है।
उन्होंने यह भी कहा कि Russia-Ukraine conflict के बाद से सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारतीय नागरिकों को राहत देने के लिए प्रतिबद्ध रही है और एक बार फिर वही रुख अपनाया गया है।
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