ओवैसी को गठबंधन की आस
बिहार की यात्रा के पहले ही दिन AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नई सियासी बहस छेड़ दी. ओवैसी ने स्पष्ट संकेत दिए कि उनकी पार्टी RJD के साथ महागठबंधन में शामिल होने को तैयार है. बशर्ते उन्हें 6 सीटें दी जाएं. इस मांग को ठुकराए जाने की स्थिति में उन्होंने जनता को यह बताने की चुनौती भी दी है कि कौन BJP को फायदा पहुंचाना चाहता है.
बिहार में चुनाव के मद्देनजर ओवैसी ने ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ नाम की चार दिवसीय यात्रा शुरू की है, जिसमें वे सीमांचल क्षेत्र के भीतर विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच कर जनता से संवाद कर रहे हैं.
पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 5 सीटें जीती, जो सभी सीमांचल क्षेत्र की थीं. इसके अलावा माना जाता है कि AIMIM के चुनाव लड़ने से महागठबंधन को बड़ा नुकसान हुआ. जबकि मुस्लिम बहुल इस इलाके में बीजेपी 12 सीटे जीतने में कामयाब रही थी. कहा ये भी जाता है कि बिहार में 2020 के चुनाव में सीमांचल ने किंगमेकर की भूमिका निभाई थी.
महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव ओवैसी ने पहली बार नहीं दिया है. इसके पहले भी उनकी पार्टी की तरफ से प्रस्ताव दिया गया था. लेकिन कांग्रेस और आरजेडी दोनों पार्टियों ने इसे सीधे तौर पर मना कर दिया था.
बड़ा सवाल ये है कि ओवैसी महागठबंधन में शामिल क्यों होना चाहते हैं. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि महागठबंधन में शामिल होकर ओवैसी एक तीर से कई निशाने साधना चाहते हैं. पहला तो ये कि वो अपने उपर से बीजेपी की बी टीम होने का टैग हटाना चाहते हैं. दूसरा ये कि महागठबंधन में शामिल होने से उन्हे पूरे बिहार में अपना विस्तार करने का मौका मिल जाएगा. तीसरा ये कि जिस तरह से राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में भीड़ आई खासकर सीमांचल में उसे देख कर ओवैसी परेशान हो सकते हैं कि अगर इस बार उनका जादू नहीं चला तो बिहार की सियासत में उनकी एंट्री खतरे में पड़ जाएगी.
फिलहाल ओवैसी के इस प्रस्ताव पर आरजेडी ने कोई जवाब नहीं दिया है.
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