दमोह: पालतू कुत्तों और बिल्लियों में रेबीज के खतरे को देखते हुए जिले में सतर्कता बढ़ाई जा रही है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से लोगों को पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही जागरूकता अभियान और वैक्सीनेशन कैंप के जरिए रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
घरों में पाले जाने वाले कुत्ते और बिल्लियां भी रेबीज की चपेट में आ सकते हैं। पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अगर किसी जानवर के व्यवहार में अचानक बदलाव आए, वह असामान्य रूप से आक्रामक या बेचैन हो जाए, अजीब आवाजें निकाले या पानी पीने में परेशानी दिखे, तो सावधानी बरतनी चाहिए। संक्रमित जानवर के काटने या उसकी लार के संपर्क में आने से रेबीज फैल सकता है। ऐसे मामलों में लापरवाही करने से बचने की सलाह दी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया में हर साल करीब 59 से 60 हजार लोगों की मौत रेबीज से होती है। भारत में भी यह बीमारी गंभीर खतरा बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल करीब 18 से 20 हजार लोगों की मौत रेबीज के कारण होने का अनुमान है। बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद यह लगभग हमेशा घातक होती है, इसलिए संक्रमण की आशंका होने पर समय पर चिकित्सकीय मदद लेना बेहद जरूरी है।
रेबीज से बचाव में शुरुआती सावधानी अहम भूमिका निभाती है। किसी जानवर के काटने के बाद घाव को अच्छी तरह साफ करना, तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना और जरूरत के अनुसार संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है। दमोह जैसे इलाकों में, जहां आबादी के आसपास बड़े वन क्षेत्र भी हैं, जानवरों की आवाजाही पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण है।
मध्य प्रदेश का दमोह जिला बड़े वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। जिले के आसपास पन्ना टाइगर रिजर्व और रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व जैसे वन क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे में जंगली जानवरों और आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले पशुओं के बीच संपर्क की संभावना बनी रहती है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से दूसरे पशुओं में भी रेबीज फैलने का खतरा हो सकता है, जिससे इंसानों तक संक्रमण पहुंचने की आशंका रहती है।
रेबीज की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पालतू और अन्य जानवरों के लिए वैक्सीनेशन कैंप लगाए जा रहे हैं। दमोह में भी पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विश्व रेबीज दिवस के मौके पर आयोजित वैक्सीनेशन कैंप में पशुपालक अपने जानवरों को लेकर पहुंचे और विभाग की ओर से उन्हें टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई।
जागरूकता अभियान के बीच दमोह में पशुपालकों की भागीदारी भी देखने को मिली। लोग पालतू जानवरों की सुरक्षा के साथ अपने और परिवार के बचाव को लेकर भी सतर्क हो रहे हैं। विश्व रेबीज दिवस पर आयोजित वैक्सीनेशन कैंप में पशुपालकों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग, दमोह के उपसंचालक डॉ. के.पी. कुर्मी ने भी लोगों को रेबीज से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी।
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