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पितृ पक्ष में ये 5 काम कर लिए तो दूर हो सकता है पितृ दोष! जानें तर्पण से लेकर दान तक कौन-से उपाय माने जाते हैं शुभ

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को कुंडली से जुड़ा दोष माना गया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

पितृ पक्ष में किए जाने वाले इन उपायों को लेकर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें तर्पण और पिंडदान से लेकर मंत्र जाप, पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और जरूरतमंदों को अन्न-जल का दान करना शामिल है।

तर्पण और पिंडदान को माना जाता है विशेष

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। इसके लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल, गंगाजल और कुश मिलाकर पितरों को तर्पण देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।

गीता पाठ और मंत्र जाप की भी है मान्यता

पितृ पक्ष के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ और पितृ गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से इनका पाठ और जाप करने से पितृ दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

पीपल के नीचे दीपक जलाना माना जाता है शुभ

पितृ पक्ष में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की भी धार्मिक मान्यता है। इसके लिए आटे में हल्दी और काले तिल मिलाकर चौमुखी दीपक तैयार किया जाता है। इसके बाद इसमें सरसों का तेल डालकर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है।

गाय, कौए और पक्षियों को खिलाएं भोजन

पितृ पक्ष में गाय, कौए और पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान प्रतिदिन इन्हें भोजन खिलाना शुभ माना जाता है। खास तौर पर घर में बनने वाली पहली रोटी गाय को खिलाने की परंपरा कई जगह प्रचलित है।

अन्न और जल का करें दान

पितृ पक्ष में अन्न और जल का दान भी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने तथा पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस तरह किए गए दान से पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त होती है।

vineet verma

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