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भीषण गर्मी में क्यों गुल हो रही बिजली? यूपी में बढ़ी मांग, कई प्लांट बंद… लखनऊ के हजारों घरों में मचा हाहाकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट एक बार फिर गहराने लगा है। बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि कई उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी लखनऊ में देखने को मिल रहा है, जहां शॉर्ट सर्किट, केबल फॉल्ट और ओवरलोडिंग के चलते शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लोगों को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।

गर्मी बढ़ते ही फिर सामने आई बिजली व्यवस्था की चुनौती

मई महीने में भीषण गर्मी के दौरान उत्पादन इकाइयों के बंद होने से प्रदेश में बिजली संकट पैदा हो गया था। कुछ दिनों तक मौसम में राहत मिलने के बाद हालात सामान्य हुए, लेकिन अब एक बार फिर तापमान बढ़ने के साथ बिजली उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खामियां सामने आने लगी हैं। शनिवार और रविवार की रात करीब 2597 मेगावॉट क्षमता की कई उत्पादन इकाइयां बंद रहीं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।

कई बड़े पावर प्लांट तकनीकी खराबी से प्रभावित

खुर्जा की पहली इकाई और घाटमपुर की पहली इकाई पांच जून को बंद हो गई थीं। हालांकि घाटमपुर की पहली इकाई छह जून को दोबारा चालू कर दी गई। वहीं घाटमपुर की दूसरी इकाई 24 मई से टरबाइन में तकनीकी दिक्कत के कारण बंद है। इस इकाई की कुल क्षमता 660 मेगावॉट है, जिसमें से 561 मेगावॉट बिजली उत्तर प्रदेश को मिलती है।

इसके अलावा हरदुआगंज एक्सटेंशन की दूसरी इकाई भी पांच जून से बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण बंद है। इसकी क्षमता भी 660 मेगावॉट है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह इकाई आठ जून से दोबारा चालू हो सकती है। वहीं ओबरा की 200 मेगावॉट क्षमता वाली इकाई-10 भी चार जून से बंद पड़ी है।

31 हजार मेगावॉट के पार पहुंची बिजली की मांग

प्रदेश में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। शनिवार और रविवार की रात अधिकतम मांग 31,049 मेगावॉट दर्ज की गई। मांग पूरी करने के लिए ऊर्जा विनिमय बाजार से 3229 मेगावॉट बिजली खरीदनी पड़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान और उमस बढ़ने के साथ मांग में और इजाफा हो सकता है।

उमस बढ़ने पर और गहरा सकता है संकट

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, केवल गर्मी ही नहीं बल्कि उमस के मौसम में बिजली की मांग सबसे ज्यादा बढ़ती है। प्री-मानसून के दौरान लोग कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर का अधिक उपयोग करते हैं। यदि इसी दौरान उत्पादन इकाइयों में तकनीकी समस्याएं बनी रहीं तो महंगी बिजली खरीदने की जरूरत पड़ेगी, जिसका असर भविष्य में उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

पीजीआई क्षेत्र में 24 घंटे से ज्यादा बिजली संकट

राजधानी के पीजीआई क्षेत्र में बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। एक भूमिगत केबल में फॉल्ट आने के कारण एकता नगर, पंचवटी कॉलोनी, मीना आवास, ओम नगर, शाहू कॉलोनी, शिवधाम कॉलोनी, सबाखेड़ा, कल्ली पश्चिम और कल्ली बाजार समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई।

करीब तीन हजार घरों की बिजली गुल हो गई और लगभग 15 हजार लोग प्रभावित हुए। रातभर बिजली नहीं मिलने से इनवर्टर भी जवाब दे गए। कूलर और पंखे बंद होने से बच्चे, बुजुर्ग और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

फाल्ट नहीं मिला, वैकल्पिक व्यवस्था भी हुई फेल

बिजली विभाग ने रात में ही फाल्ट तलाशने का काम शुरू किया, लेकिन सटीक स्थान नहीं मिल सका। रविवार दोपहर वैकल्पिक फीडर से बिजली आपूर्ति शुरू की गई, लेकिन ओवरलोडिंग के कारण शाम पांच बजे फिर आपूर्ति बाधित हो गई। इससे नाराज लोगों ने अंबेडकर पावर हाउस पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

चिनहट में उपकेंद्र ठप, लोगों ने किया हंगामा

चिनहट के शिवपुरी उपकेंद्र में शनिवार देर रात खराबी आ गई, जिससे तिवारीगंज, सतरिख रोड, मुक्ति विहार और अयोध्या रोड से जुड़े कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। नाराज उपभोक्ताओं ने उपकेंद्र पहुंचकर विरोध जताया। बाद में कर्मचारियों ने फाल्ट दुरुस्त कर रात करीब ढाई बजे आपूर्ति बहाल की।

डालीगंज और मलिहाबाद में भी परेशानी

डालीगंज के इक्का स्टैंड उपकेंद्र क्षेत्र में रविवार शाम अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई। इससे कुतुबपुर, मोहन मेकिंग रोड, बब्बू वाली गली और लाहौरगंज समेत आसपास के इलाकों की करीब 40 हजार आबादी प्रभावित हुई। बिजली विभाग के अनुसार तकनीकी कारणों से आपातकालीन शटडाउन लिया गया था।

वहीं मलिहाबाद तहसील रोड पर एक खंभे से जुड़े एलटी लाइन के तारों में आग लगने से भी बिजली आपूर्ति प्रभावित रही और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

 

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