मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड यानी चर्चित ब्लू ड्रम केस में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अदालत में जज के एक कदम ने सबका ध्यान खींचा। फैसला सुनाने के बाद जज अरविंद कुमार मिश्रा ने उस पेन को फेंक दिया, जिससे उन्होंने सजा से जुड़े फैसले पर हस्ताक्षर किए थे। आखिर मौत की सजा सुनाने के बाद जज ऐसा क्यों करते हैं? इसके पीछे एक न्यायिक परंपरा बताई जाती है।
इस मामले ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या का आरोप उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला पर लगा था। आरोप था कि हत्या के बाद शव के 15 टुकड़े किए गए और उन्हें नीले रंग के ड्रम में भर दिया गया। इसी वजह से यह मामला ब्लू ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ।
मामले में अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे के मुताबिक, अदालत ने मुस्कान और साहिल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50-50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई। फैसले के दौरान जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को दंड देना ही धर्म है।
सजा सुनाए जाने के समय दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों रोने लगे।
अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे के अनुसार, बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि हत्या करते हुए दोनों आरोपियों को किसी ने नहीं देखा और उनके बच्चे भी हैं, इसलिए इन परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मामले से जुड़े सबूत रखे। फैसले में हत्या और शव के टुकड़े कर ड्रम में भरने की घटना को गंभीर और पूर्व नियोजित अपराध के रूप में देखा गया। अदालत ने आरोपियों को मौत की सजा सुनाई।
मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने के बाद जज ने जिस पेन से फैसले पर हस्ताक्षर किए थे, उसे फेंक दिया। इस घटना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पेन को नष्ट करने या उसकी निब तोड़ने की न्यायिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
इस परंपरा का प्रतीकात्मक अर्थ यह बताया जाता है कि जिस पेन से किसी व्यक्ति को मृत्युदंड देने का फैसला लिखा गया, उसका दोबारा इस्तेमाल न किया जाए। इसे न्यायाधीश के फैसले से जुड़े दायित्व की गंभीरता और निर्णय के अंतिम स्वरूप का प्रतीक भी माना जाता है।
हालांकि, पेन फेंकने या उसकी निब तोड़ने की प्रथा को हर अदालत में अनिवार्य रूप से लागू होने वाला नियम नहीं समझना चाहिए। इस मामले में जज के ऐसा करने के पीछे की वजह के बारे में उपलब्ध विवरण इसे परंपरा से जोड़ता है।
ब्लू ड्रम हत्याकांड में मौत की सजा और फैसले के बाद पेन फेंकने की घटना ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है।
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