नई दिल्ली: हाई ब्लड प्रेशर ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लक्षण कई बार लंबे समय तक नजर नहीं आते। लेकिन इसे नजरअंदाज करना दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे में दवाओं के साथ खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना भी जरूरी है। अनार, चुकंदर और केला जैसे आम खाद्य पदार्थ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनका सेवन किस तरह और कितनी मात्रा में करना चाहिए, यह जानना भी उतना ही जरूरी है।
PSRI हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायटेटिक्स विभाग की प्रमुख डॉ. शालिनी गार्विन ब्लिस के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में संतुलित आहार की अहम भूमिका होती है। सही खान-पान, नमक का सीमित सेवन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से बीपी को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जिन लोगों को हाई बीपी के लिए दवाएं दी गई हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए।
अनार में पॉलीफेनॉल नामक प्लांट-बेस्ड यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। कुछ शोधों में अनार के सेवन से ब्लड प्रेशर में सुधार के संकेत मिले हैं।
अनार खाने का बेहतर तरीका साबुत फल का सेवन करना है। इससे एंटीऑक्सीडेंट के साथ डाइटरी फाइबर भी मिलता है और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है। अगर आप अनार का जूस पीना पसंद करते हैं, तो बिना चीनी वाला जूस चुनें और इसकी मात्रा सीमित रखें। विशेषज्ञ के मुताबिक, लगभग 150 मिलीलीटर जूस तक सेवन किया जा सकता है।
चुकंदर में प्राकृतिक नाइट्रेट पाया जाता है, जिसे शरीर नाइट्रिक ऑक्साइड में बदलता है। यह यौगिक रक्त वाहिकाओं को आराम देने और उन्हें फैलाने में मदद करता है, जिससे ब्लड फ्लो बेहतर हो सकता है।
चुकंदर के जूस पर हुए शोधों में भी इसके संभावित फायदे सामने आए हैं। वर्ष 2022 में प्रकाशित सात रैंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल के सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में हाई ब्लड प्रेशर वाले 218 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि नाइट्रेट से भरपूर चुकंदर का जूस पीने वाले लोगों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी ऊपर वाला बीपी, जूस नहीं पीने वालों की तुलना में औसतन करीब 5 mmHg कम हुआ।
चुकंदर को सलाद, सब्जी या पकाकर भी खाया जा सकता है। एक छोटा चुकंदर, जिसका वजन लगभग 75 से 100 ग्राम हो, आहार में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, जिन लोगों को किडनी में पथरी की समस्या है, उन्हें चुकंदर का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।
केला पोटैशियम का अच्छा स्रोत है। यह खनिज शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने के साथ मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। पोटैशियम, अधिक सोडियम यानी नमक के सेवन से ब्लड प्रेशर पर पड़ने वाले कुछ नकारात्मक प्रभावों को कम करने में भी मदद कर सकता है।
एक मध्यम आकार के केले में लगभग 400 से 450 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है। इसे नियमित आहार में शामिल करने से शरीर को इस जरूरी खनिज की पूर्ति करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और अन्य फल भी पोटैशियम के अच्छे स्रोत हैं।
हालांकि, किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है। ऐसे मरीजों को केला या पोटैशियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए केवल अनार, चुकंदर और केला खाना पर्याप्त नहीं है। खान-पान में विविधता रखना भी जरूरी है। इसके लिए पालक और चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, ब्रोकली, दालें, साबुत अनाज और दूसरे फल शामिल किए जा सकते हैं।
इन खाद्य पदार्थों से शरीर को पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। संतुलित आहार अपनाने से समग्र स्वास्थ्य बेहतर रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए सिर्फ हेल्दी फूड खाना ही काफी नहीं है। रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, अनार, चुकंदर और केला संतुलित आहार का हिस्सा बनकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। लेकिन इन खाद्य पदार्थों को हाई बीपी की दवाओं का विकल्प नहीं समझना चाहिए। नियमित रूप से बीपी की जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक इलाज जारी रखना जरूरी है।
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