नई दिल्ली: जुलाई की शुरुआत में जोरदार बारिश के बाद अब देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई इलाकों में बारिश लगभग थम गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन राज्यों को अच्छी बारिश के लिए अभी करीब पांच से सात दिन और इंतजार करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों समेत देश के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी रहेंगी। इन क्षेत्रों में 20 से 22 जुलाई के बीच एक बार फिर मानसून के सक्रिय होने और व्यापक बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि यह मानसून का सामान्य ‘ब्रेक’ चरण है, जो इस बार अपेक्षाकृत लंबा खिंच गया है। फिलहाल मानसूनी ट्रफ का पश्चिमी हिस्सा हिमालय की तराई की ओर खिसक गया है, जबकि बंगाल की खाड़ी में ओडिशा के पास बना कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी भारत की ओर नमी को खींच रहा है।
इसी कारण बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर-पूर्व के राज्यों में अच्छी बारिश जारी है, जबकि मध्य और पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्से बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले पांच से सात दिनों में मौसम प्रणाली पश्चिम की ओर बढ़ सकती है। 16 और 17 जुलाई को ओडिशा में भारी बारिश की संभावना है। वहीं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इस दौरान कहीं-कहीं हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
हालांकि व्यापक और अच्छी बारिश की संभावना 20 से 22 जुलाई के बीच अधिक मानी जा रही है।
मानसून की धीमी रफ्तार का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जून में देशभर में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश से यह कमी घटकर 19 प्रतिशत तक पहुंची, लेकिन इसके बाद फिर बारिश कमजोर पड़ने से बुआई प्रभावित हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष 10 जुलाई तक 632 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 531 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी बुआई में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर दलहनों की बुआई पर पड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में दलहन की बुआई 23 प्रतिशत कम हुई है। इसके अलावा मोटे अनाज में 22 प्रतिशत, तिलहन में 21 प्रतिशत, कपास में 15 प्रतिशत और धान में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कई किसान अभी बुआई टाल रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसे क्षेत्रों में कम अवधि वाली मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि खरीफ फसलों की बुआई का समय 15 अगस्त तक रहता है और 20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की संभावना है। यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही रहता है तो बुआई में आई कमी की काफी हद तक भरपाई संभव होगी।
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