नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की इजरायल जा रही फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर हुई हाथापाई के बाद विमान की सुरक्षा व्यवस्था और उड़ान के नियमों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इस घटना में ओमान के को-पायलट ने भारतीय पायलट स्मित माच्छर पर हमला किया था। इसके बावजूद स्थिति को संभालते हुए संभावित दुर्घटना या विमान पर कब्जे की कोशिश को नाकाम किया गया। इसी के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि वाणिज्यिक उड़ान के दौरान कॉकपिट में कम से कम दो क्रू सदस्यों की मौजूदगी क्यों जरूरी मानी जाती है और यह नियम आखिर कैसे अस्तित्व में आया।
विमानन सुरक्षा व्यवस्था में टू-पर्सन कॉकपिट नियम को अहम माना जाता है। इसके तहत उड़ान के दौरान कॉकपिट में कम से कम दो क्रू सदस्यों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। अगर मुख्य पायलट या सह-पायलट किसी वजह से कॉकपिट से बाहर जाता है, जैसे शौचालय जाने के लिए, तो उसकी जगह कुछ समय के लिए केबिन क्रू के किसी सदस्य को कॉकपिट में भेजा जा सकता है। इसमें एयर होस्टेस या फ्लाइट अटेंडेंट शामिल हो सकते हैं।
इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी समय कॉकपिट पूरी तरह एक व्यक्ति के भरोसे न रहे और आपात स्थिति में दूसरा प्रशिक्षित सदस्य मौजूद हो।
उड़ान के दौरान अगर अकेले कॉकपिट में मौजूद पायलट अचानक बेहोश हो जाए या उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ जाए तो स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कॉकपिट के सुरक्षा दरवाजे के कारण बाहर मौजूद व्यक्ति के लिए तुरंत अंदर पहुंचना आसान नहीं होता।
ऐसे में कॉकपिट में मौजूद दूसरा व्यक्ति आपात स्थिति में दरवाजा खोलने, विमान की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर रेडियो के जरिए संपर्क बनाए रखने में मदद कर सकता है।
कॉकपिट में दो लोगों की मौजूदगी का एक उद्देश्य जानबूझकर विमान को नुकसान पहुंचाने जैसी स्थिति के जोखिम को कम करना भी है। दूसरा व्यक्ति पायलट के फैसलों और गतिविधियों पर नजर रख सकता है और किसी असामान्य स्थिति में हस्तक्षेप कर सकता है।
9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद विमानों के कॉकपिट दरवाजों की सुरक्षा और मजबूत की गई। इन्हें बुलेटप्रूफ बनाने के साथ अंदर से लॉक किए जाने की व्यवस्था भी की गई। इसका उद्देश्य बाहरी व्यक्ति को कॉकपिट में जबरन घुसने से रोकना था।
हालांकि, मजबूत लॉकिंग व्यवस्था ने एक दूसरी चुनौती भी पैदा की। अगर कॉकपिट के अंदर अकेला पायलट दरवाजा लॉक कर दे, तो बाहर मौजूद पायलट के लिए तुरंत अंदर पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
24 मार्च 2015 को जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 के हादसे ने कॉकपिट में अकेले पायलट की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। लुफ्थांसा की सहायक कंपनी जर्मनविंग्स का विमान बार्सिलोना से डसेलडोर्फ जा रहा था।
उड़ान के दौरान मुख्य पायलट कॉकपिट से बाहर गया। इसी दौरान सह-पायलट अंद्रेआस लुबित्ज ने कॉकपिट का दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया। इसके बाद विमान फ्रांस के आल्प्स क्षेत्र में पहाड़ियों से टकरा गया। हादसे में विमान में सवार सभी 150 यात्रियों और क्रू सदस्यों की मौत हो गई।
मुख्य पायलट ने कॉकपिट में दोबारा प्रवेश करने के लिए दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण वह अंदर नहीं पहुंच सका।
इससे पहले 29 नवंबर 2013 को मोजाम्बिक एयरलाइंस फ्लाइट 470 दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। विमान मोजाम्बिक से अंगोला जा रहा था और नामीबिया के एक राष्ट्रीय उद्यान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
हादसे के दौरान सह-पायलट कॉकपिट से बाहर गया था। इसके बाद कैप्टन हेर्मिनियो दो सान्तोस फर्नांडीस ने कॉकपिट को अंदर से लॉक कर लिया। जांच के मुताबिक उन्होंने ऑटोपायलट की सेटिंग में बदलाव किया और विमान को तेजी से नीचे की ओर मोड़ दिया। सह-पायलट ने कई बार कॉकपिट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसे अंदर प्रवेश नहीं मिला। हादसे में 33 लोगों की जान गई।
1997 के सिल्क एयर फ्लाइट 185 और 1999 के इजिप्ट एयर फ्लाइट 990 हादसों की जांच में भी कॉकपिट में मौजूद पायलट के फैसलों को लेकर सवाल उठे थे। जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के बाद पायलटों की मानसिक स्थिति की जांच और कॉकपिट तक पहुंच से जुड़े सुरक्षा नियमों की समीक्षा पर भी ध्यान गया।
इन घटनाओं ने विमानन क्षेत्र में इस बात पर बहस को मजबूत किया कि कॉकपिट में एक व्यक्ति की मौजूदगी से पैदा होने वाले जोखिम को किस तरह कम किया जाए।
जर्मनविंग्स हादसे के बाद यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी और अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन की ओर से वाणिज्यिक उड़ानों में दो लोगों की कॉकपिट मौजूदगी से जुड़े नियमों के पालन की सिफारिश की गई। भारत में भी नागर विमानन महानिदेशालय ने भारतीय विमानन कंपनियों के लिए उड़ान के दौरान कॉकपिट में दो क्रू सदस्यों की मौजूदगी की व्यवस्था रखी है।
इस नियम के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि कॉकपिट कभी भी पूरी तरह एक व्यक्ति पर निर्भर न रहे और किसी अचानक चिकित्सा आपात स्थिति, सुरक्षा खतरे या असामान्य गतिविधि की स्थिति में दूसरा व्यक्ति तत्काल मौजूद हो।
विमानन क्षेत्र में सुरक्षा नियम कई बड़े हादसों और उनसे मिली सीख के आधार पर समय-समय पर बदले गए हैं। कॉकपिट की सुरक्षा, दरवाजों की मजबूती, प्रवेश व्यवस्था और क्रू की मौजूदगी जैसे नियमों को भी इन्हीं अनुभवों के आधार पर मजबूत किया गया है।
टू-पर्सन कॉकपिट व्यवस्था इसी सुरक्षा सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तकनीकी प्रणालियों के साथ मानवीय स्तर पर भी एक अतिरिक्त सुरक्षा परत बनाए रखना है।
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