जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान ChatGPT या किसी सॉफ्टवेयर तक ही लिमिटेड रहता है। लेकिन परदे के पीछे एक बड़ी हलचल हो रही है। भारत में AI निवेश का अगला दौर सॉफ्टवेयर से हटकर अब उस “हार्डवेयर और बिजली” की तरफ मुड़ गया है जो इन डिजिटल दिमागों को जिंदा रखते हैं।
सॉफ्टवेयर नहीं, ‘पिक्स और शवेल्स’ का जमाना
गोल्ड रश के समय सबसे ज्यादा पैसा उन लोगों ने कमाया था जो कुदाल और फावड़ा बेचते थे। आज के AI युग में, यही काम पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां कर रही हैं।
एक नार्मल Google सर्च के मुकाबले एक AI प्रॉम्प्ट 10 गुना ज्यादा बिजली खर्च करता है। भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक 1.3 GW से बढ़कर 5 GW होने का अनुमान है। AI सर्वर बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं। इन्हें ठंडा रखने के लिए KRN Heat Exchanger जैसी कंपनियों के कूलिंग सिस्टम अब ‘लक्जरी’ नहीं बल्कि ‘कंपलसरी’ हो गए हैं। भारत सरकार और प्राइवेट कम्पनी अगले कुछ सालो में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी इन्वेस्ट कर रहे हैं।
भारत का AI मिशन
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘MANAV’ विजन और IndiaAI मिशन ने इस ट्रेंड को और मजबूती दी है। सरकार का लक्ष्य भारत में 20,000+ GPU की कंप्यूटिंग क्षमता स्थापित करना है। इसका सीधा मतलब है, देश के कोने-कोने में नए डेटा सेंटर बनेंगे, जिसके लिए सीमेंट, स्टील, तांबा और बिजली की भारी मांग होगी।
एक्सपर्ट की राय
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि जो इन्वेस्ट्स सिर्फ IT स्टॉक्स के पीछे भाग रहे हैं, वे बड़ी तस्वीर भूल रहे हैं। असली मुनाफा उन कंपनियों में है जो AI के लिए “लैंड एंड एनर्जी” तैयार कर रही हैं।
एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है की “AI सिर्फ एक कोड नहीं है; ये बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर का एक विशाल जाल है। आने वाले दशक में ऊर्जा कंपनियां ही AI की असली रीढ़ होंगी।”