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आंध्र प्रदेश से यूपी तक चक्रवात अर्नब का असर, कब थमेगी तूफान की रफ्तार? लखनऊ-गोरखपुर समेत इन जिलों में बारिश का अनुमान

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचने के बाद अब उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। समुद्र से जमीन पर आने के बाद इसकी ताकत धीरे-धीरे कम होने का अनुमान है, लेकिन इसके कमजोर पड़ने के बावजूद बारिश का खतरा बना रह सकता है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के बाद तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में सवाल है कि अर्नब की रफ्तार कब कम होगी और यूपी पहुंचने तक इसका कितना असर बाकी रह सकता है?

आंध्र प्रदेश के तट से शुरू होगा तूफान का अगला सफर

28 अक्टूबर 2026 की सुबह चक्रवात अर्नब पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश के तट के पास स्थित था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसका केंद्र नरसापुर से लगभग 30 किलोमीटर पूर्व, यनम से 45 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से करीब 70 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।

मौसम पूर्वानुमान में तूफान के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार करने की संभावना जताई गई थी। इस दौरान हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और कुछ झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान था। ऐसे हालात में तटीय इलाकों में तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बढ़ सकता है।

तट पार करने के बाद चक्रवात की ताकत में कमी आने की संभावना है। हालांकि, तूफान की रफ्तार घटने का मतलब यह नहीं है कि बारिश का खतरा भी तुरंत खत्म हो जाएगा। कमजोर पड़ने के बाद भी चक्रवात अपने रास्ते में कई इलाकों में भारी बारिश करा सकता है।

किन राज्यों से होकर आगे बढ़ सकता है अर्नब?

चक्रवात अर्नब का संभावित रास्ता आंध्र प्रदेश के अंदरूनी इलाकों से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ सकता है। इसके बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इसका असर देखने को मिलने का अनुमान है। आगे बढ़ते-बढ़ते तूफान कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके बचे हुए असर से उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।

दरअसल, समुद्र के ऊपर चक्रवात को नमी और ऊर्जा मिलती रहती है। जमीन पर पहुंचने के बाद यह आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे उसकी ताकत घटने लगती है। जमीन की बनावट और आसपास चलने वाली हवाएं भी तूफान की दिशा और रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।

अनुमान है कि अर्नब की तीव्रता कम होने के साथ यह गंभीर चक्रवाती तूफान से चक्रवाती तूफान, फिर गहरे दबाव और अंत में कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक गति और रास्ता मौजूदा मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

लखनऊ से गोरखपुर तक बारिश का कितना खतरा?

चक्रवात अर्नब को लेकर उत्तर प्रदेश में भी मौसम बदलने की संभावना जताई गई है। संभावित पूर्वानुमान के अनुसार, लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज समेत कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, बस्ती और कुशीनगर जैसे जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की आशंका जताई गई है।

पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 से 30 अक्टूबर के बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। 30 अक्टूबर के आसपास चक्रवात का कमजोर असर उत्तर प्रदेश के पूर्वी या मध्य हिस्सों में कम दबाव वाले क्षेत्र के रूप में रह सकता है।

हालांकि, अभी किसी खास जिले में बारिश की मात्रा, उसकी तीव्रता या तूफान के असर का सटीक समय तय मानना सही नहीं होगा। मौसम की परिस्थितियां बदलने के साथ पूर्वानुमान में भी बदलाव हो सकता है। इसलिए प्रभावित इलाकों के लोगों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।

तूफान कमजोर हुआ, फिर भी क्यों बढ़ सकती है परेशानी?

चक्रवात की ताकत कम होने के बाद भी लगातार बारिश कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है। निचले इलाकों में जलभराव, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने तथा सड़क और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बना रह सकता है। गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तेज हवाओं और समुद्र की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, उत्तर प्रदेश के संभावित प्रभावित क्षेत्रों में गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना बेहतर है।

किसानों के लिए भी मौसम का यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। बारिश की आशंका को देखते हुए खेतों में खड़ी फसल और काटकर रखी गई उपज को सुरक्षित रखने की तैयारी करना उपयोगी रहेगा।

फिलहाल, चक्रवात अर्नब की आगे की दिशा, उसके कमजोर होने की रफ्तार और उत्तर प्रदेश में बारिश का वास्तविक असर मौसम की ताजा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए किसी भी जिले के लिए बारिश को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले मौसम विभाग के नवीनतम अपडेट देखना जरूरी है।

vineet verma

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