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10 या 11 जुलाई… आखिर कब है योगिनी एकादशी? व्रत से पहले जान लें सही तारीख, पारण समय और पूजा का शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार एकादशी की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है कि व्रत 10 जुलाई को रखा जाए या 11 जुलाई को।

योगिनी एकादशी 2026 की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 15 मिनट से होगी। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा।

फ्यूचर पंचांग के अनुसार, 11 जुलाई को सूर्योदय के तुरंत बाद एकादशी तिथि समाप्त हो रही है। इसलिए शास्त्रों के नियमों के अनुसार गृहस्थ श्रद्धालु 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत का पालन कर सकते हैं।

पारण का समय

योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 57 मिनट तक किया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 बजे से 5:26 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 1:24 बजे से 2:28 बजे तक

विजय मुहूर्त: शाम 4:35 बजे से 5:39 बजे तक

भगवान विष्णु के मंत्र

  1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
    हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
  3. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
  4. ॐ विष्णवे नमः
  5. ॐ हूं विष्णवे नमः
  6. ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥

 

vineet verma

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